हापुड़ में गांव बझेड़ा खुर्द में भीड़ के हमले में घायल हुए गांव मदापुर निवासी समयद्दीन अदालत के फैसले से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों को उनके किए की सजा मिल गई। रमजान के पहले दिन उन्हें न्याय मिलने की खुशी है।
घायल समयद्दीन ने आपबीती बताई। घटना के बारे में बातचीत करते हुए समयद्दीन भावुक हो गए। बोले, 18 जून 2018 की दोपहर करीब 11 बजे का समय था। गांव के ही हसन के साथ पशुओं के लिए चारा काटने के लिए गए थे। उन्होंने जैसे ही चारा काटना शुरू किया, उनका दोस्त कासिम भी पहुंच गया। इसी दौरान काफी संख्या में भीड़ बौड़ा खुर्द की ओर से आ गई। भीड़ को देखकर कम उम्र हसन वहां से भाग निकला। मेरी उम्र करीब 65 साल रही होगी। कासिम का शरीर भी भारी था। इस वजह से हम दोनों भाग न सके और लोगों की भीड़ में फस गए। तभी भीड़ ने दोनों को घेरकर हमला बोल दिया। बेरहमी से पीटाई की। भीड़ के सिर पर खून सवार था। उनके हाथों में लाठी-डंडे और धारदार हथियार थे। गोकशी का झूठा आरोप लगाते भीड़ उन पर वार कर रही थी।
इसके बाद वहां से उन्हें पकड़कर अपने गांव के पास जंगल में ले आए। इस दौरान कासिम और उन्हें बेरहमी से पीटा। जमीन पर पड़े पानी और रहम की भीख मांग रहे थे, किसी ने एक नहीं सुनी। बाद में पुलिस पहुंची तो लोग कुछ शांत हुए। पुलिस उन्हें लेकर जैसे तैसे वहां से निकली। वह पूरे 17 दिन अस्पताल में भर्ती रहे, जब जाकर जान बची।