हापुड़ में बिजली चोरी के बाद ऊर्जा निगम कार्यालय से जारी नोटिसों में फिर से फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिसमे विजिलेंस की टीम ने 12 नोटिस पकड़े हैं, उपभोक्ताओं को इन नोटिसों के जरिए करीब तीन से चार लाख तक का जुर्माना बनाकर भेजा गया था। लेकिन पोर्टल पर इसे 30 से 40 हजार में ही निपटा दिया गया। पांच महीने पहले से इस घोटाले की जांच चल रही है, लेकिन अधिकारी दोषियों को बचाने कोई कसर नहीं छोड़ रहे।
लाइन लॉस रोकने के लिए जिले में बिजली चोरी का अभियान चल रहा है। ऊर्जा निगम की टीम के साथ विजिलेंस भी लगातार कार्यवाही कर रही है, लेकिन सामने आये ऐसे फर्जीवाड़े रुकने का नाम ही नहीं ले रहे है। बिजली चोरी मिलने के बाद चेकिंग रिपोर्ट संबंधित डिवीजन कार्यालय में भेज दी जाती है। यहां इस पटल का कार्य देख रहे कर्मचारी और अधिकारी उपभोक्ताओं को लाखों के नोटिस बनाकर भेजते हैं, ये नोटिस सरकारी दस्तावेज पर ही जारी होते हैं। उच्चस्तरीय अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं जैसे आदेश मिलेंगे, उसके अनुसार कार्यवाही की जाएगी।
लाखों का जुर्माना देख उपभोक्ताओं का डिवीजन कार्यालय आना लाजमी है, इसी का फायदा उठाकर उपभोक्ताओं से तय कर लिया जाता है कि जुर्माना राशि से आठ से दस गुना कम की रसीद दी जाएगी, इसके बदले सुविधा शुल्क भी तय कर लिया जाता है। ऐसे ही 80 से ज्यादा नोटिस अब तक पकड़े जा चुके हैं, हाल ही में फिर से विजिलेंस की टीम ने 12 नोटिस पकड़े हैं।
विजिलेंस की टीम द्वारा हाल ही में ऐसे पकड़े नोटिस हैं। जिसमें उपभोक्ता विपिन कुमार को 374604 रुपये का जुर्माना बनाकर भेजा गया, पोर्टल पर इसे 35 हजार में ही खत्म कर दिया। कुशलपाल को 312682 रुपये का जुर्माना नोटिस भेजा, जिसे 6800 रुपये में ही खत्म कर दिया। इसके अलावा सालाबाद निवासी किरणपाल को 319110, सेहल निवासी सोमपाल को 82150, बड्ढा निवासी सुनील को 85456 रुपये, ढाहना निवासी सुनील कुमार को 53755, भोवापुर निवासी सेंसरपाल को 79456, भोवापुर निवासी राम सिंह को 75124, सलारपुर निवासी अवनीश को 166188, सलारपुर निवासी यशवीर को 137121 को भेजे नोटिसों में भी गड़बड़ी की गई है।
अधीक्षण अभियंतायूके सिंह- ने बताया की इस मामले की जांच उच्चस्तरीय अधिकारी कर रहे हैं, मामले से जुड़े एक कर्मचारी को सर्किल कार्यालय से संबद्ध किया गया है। एमडी कार्यालय से जैसे आदेश मिलेंगे, उसके अनुसार कार्यवाही की जाएगी।