जनपद हापुड़ में नशीली दवाओं की बिक्री पर शासन गंभीर है। बीते दिनों जिले में एक ट्रांसपोर्टर कंपनी में कफ सिरप फेंसिडिल की बड़ी खेप पकड़ी थी। वहीं अब जिले के मेडिकल स्टोरों की भी जांच होगी। इन पर स्टॉक का सत्यापन किया जाएगा।
नशीली दवाओं की बिक्री पर सख्ती बढ़ गयी है। नशे के रूप में खांसी की दवा के इस्तेमाल को देखते हुए औषधि विभाग ने दवाओं के भंडारण, खरीद व बिक्री की अधिकतम सीमा तय की है। खांसी दूर करने के लिए कोडीन से बने कफ सिरप की एक दिन में एक ही शीशी खरीदी जा सकेगी। वहीं, अनिद्रा, दर्द निवारक व डिप्रेशन की दवाओं के भंडारण की क्षमता तय की गई है।
अभी तक की जांच में पता चल रहा है कि दवाइयों के वितरक और कुछ औषधि विक्रेता नशे के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं का ज्यादा भंडारण करने के साथ अवैध बिक्री कर रहे हैं। जबकि मरीजों के लिए वास्तविक खपत काफी कम है।
अधिकारियों के अनुसार कोडीन खांसी से राहत देने वाली दवाओं में पाया जाने वाला घटक है। इसके हल्के नारकोटिक के तौर पर भी जाना जाता है। इसे अकेले या अन्य दवाओं के साथ मिलाकर दिया जाता है। शरीर में पहुंचने पर लीवर एक एंजाइम की मदद से इसे मार्फीन में बदल देता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह पर ही इसे तय मात्रा में लेना चाहिए। लेकिन कुछ वितरक और मेडिकल स्टोर संचालक अभी भी नशीली दवाओं की क्षमता से अधिक बिक्री कर रहे हैं। ऐसे में अब ऐसे वितरकों और मेडिकल स्टोर के स्टॉक की जांच की जाएगी।