हापुड़ के इंद्रलोक कालोनी में स्थित प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा बृहस्पतिवार से पांच दिवसीय बाल व्यक्तित्व विकास शिविर का शुभारंभ किया गया। जिसमें बच्चों को जीवन में नैतिकता एवं मानवीय मूल्यों की शिक्षा का पाठ पढ़ाया गया।
सेवा केंद्र प्रभारी ज्योति बहन ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। अगर बच्चों को अभी से अच्छे संस्कार का ज्ञान देंगे तो इनके चरित्र का विकास हो सकता है। संस्कारों से संस्कृति का निर्माण होता है। अपनी प्राचीन संस्कृति को बनाए रखने के लिए जिन महान विभूतियों ने महान कार्य किए उनके जीवन से हमें सीखना चाहिए। प्रेम, शांति, दया, अहिंसा, अनुशासन जैसे मूल्य जीवन में होने चाहिए। मूल्यों से ही जीवन मूल्यवान बनेगा।
बीके स्वर्णा ने कहा कि अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए सकारात्मक सोचना अच्छे कर्म करना है। शुभ कर्म करने से हर परिस्थिति में लाभ मिलता है। बीके मनु ने कहा कि बच्चों की मन की एकाग्रता पढ़ाई में जरूरी है। एकाग्रता कैसे बढ़ेगी, उसकी युक्तियां बताईं। बच्चों को मोबाइल का प्रयोग कम से कम करना है। ज्यादा मोबाइल के प्रयोग से होने वाले दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। बीके स्वाति ने बच्चों को प्रेरणादायक कहानियां सुनाकर नैतिक मूल्यों को धारण करने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में बीके प्रशांत, नरेश, दीपक भट्ट आदि मौजूद थे।
मोबाइल फोन के उपयोग के दुष्प्रभाव
नींद संबंधी समस्याएं:
आंखों पर दबाव:
शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं:
विलंबित सामाजिक विकास:
शैक्षणिक प्रदर्शन में कमी:
स्मार्टफोन की लत का खतरा:
खराब दृष्टि विकास:
माता-पिता और अन्य देखभाल करने वालों को स्क्रीन के इस्तेमाल पर उचित प्रतिबंध लगाना चाहिए, संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देना चाहिए जिसमें व्यायाम और बाहर खेलना शामिल हो, और संभावित नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए अपने बच्चों द्वारा अपने डिवाइस पर देखी जा रही जानकारी और गतिविधियों पर नज़र रखनी चाहिए। बच्चों के साथ नैतिक डिजिटल उपयोग के बारे में ईमानदार बातचीत को प्रोत्साहित करना भी महत्वपूर्ण है।