हापुड़ में लंबे समय से कमर दर्द वाले मरीजों की रीढ़ की हड्डी में टीबी पैठ बना रहा है। सीएचसी में एक महीने के अंदर 90 से ज्यादा मरीज चिन्हित कर, दवा शुरू कराई गई है। दिमाग की टीबी के मरीज भी बढ़ रहे हैं, स्क्रीनिंग में यह खुलासा हुआ है।
सीएचसी के फिजिशियन डॉ. अशरफ अली ने बताया कि कमर में दर्द को नजर अंदाज न करें। क्योंकि इन दिनों ऐसे मरीजों की रीढ़ की हड्डी में टीबी निकल रहा है। काउंसलिंग में मरीजों से मिले फीडबैक में पता चला कि पिछले छह महीने से एक साल के अंदर वह कमर दर्द को झेल रहे थे। शाम के समय हल्का बुखार और वजन कम होने की शिकायतें भी बताई। पीठ दर्द को आम दर्द मानकर नजरअंदाज न करें। इसे मामूली समझना या फिर पेन किलर खाकर टाल देना गंभीर बीमारी दे सकता है।
उन्होंने बताया कि कई मरीज ऐसे थे, जिनकी रीढ़ की हड्डी गलने लगी है। सीएचसी की ओपीडी में कमर दर्द वाले 100 मरीजों की जांच में एक से तीन को टीबी निकल रहा है। इसके अलावा गुर्दे, हड्डियों, दिमाग की टीबी के मरीज भी बढ़ रहे हैं, स्क्रीनिंग में यह खुलासा हुआ है। सीएचसी में एक महीने के अंदर करीब 90 मरीजों की टीबी की दवाएं शुरू कराई गई हैं।
सीएचसी फिजिशियन डॉ.अशरफ अली- ने बताया की पुराने कमर दर्द को नजर अंदाज न करें, ऐसे मरीजों के रीढ़ की हड्डी में टीबी के मामले बढ़े हैं। ज्यादा लापरवाही करने वालों की हड्डी में गलन भी मिली है। दवाओं से टीबी ठीक किया जा सकता है।