हापुड़ में गन्ना पेराई सत्र के अंतिम दौर में क्रेशरों ने 420 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने की खरीद शुरू कर दी है, जो चीनी मिलों से करीब 50 रुपये अधिक है। बाँड की चिंता करने वाले किसान ही मिलों पर जा रहे हैं, बाकी किसान नकद में गन्ना बेच रहे हैं, क्योंकि चीनी मिलों ने वर्तमान सत्र का करीब 415 करोड़ रुपये अटकाया हुआ है, महज 24 फीसदी तक ही भुगतान किया है।
जिले में हर साल गन्ने का रकबा घट रहा है, क्योंकि चीनी मिल समय से भुगतान नहीं करते। इस सत्र में सिंभावली चीनी मिल 101.67 लाख क्विंटल और ब्रजनाथपुर चीनी मिल 44 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद कर चुका है। दोनों ही मिल इस सत्र में किसानों से करीब 530 करोड़ का गन्ना क्रय कर चुके हैं।
लेकिन भुगतान के नाम पर अभी भी ढिलाई बरती जा रही है। सिंभावली चीनी मिल ने इस सत्र में महज 77 करोड़ का भुगतान किया है, वहीं ब्रजनाथपुर चीनी मिल ने भी सिर्फ 38 करोड़ का ही भुगतान किया है। जबकि 20 फीसदी फसल भी अब खेतों में नहीं बची है। बाजार में गुड़ की जबरदस्त मांग के चलते क्रेशर अब 420 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना खरीद रहे हैं। जबकि सरकार ने गन्ने का दाम 370 रुपये क्विंटल घोषित किया है। गन्ना पेराई सत्र के अंतिम दौर में नकद में पैसा मिलने से उत्साहित किसान क्रेशरों पर जाना पसंद कर रहे हैं।
जिला गन्ना अधिकारी सना आफरीन खान- ने बताया की चीनी मिलों से नियमित किसानों का भुगतान कराया जा रहा है, इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। किसानों को फसल बुवाई और उत्पादन बढ़ाने को लेकर भी जागरूक किया जा रहा है।