हापुड़ ततारपुर में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्माण के लिए जल निगम ने कदम उठाया है। लगभग 51 करोड़ रुपये की लागत से प्लांट का निर्माण होगा। टेंडर प्रक्रिया को तेज करते हुए उसे अंतिम दौर में पहुंचा दिया गया है। उम्मीद है कि अगस्त में जरूर प्लांट का निर्माण शुरू हो जाएगा। इससे पहले तहसील के कर्मचारियों की मदद से जमीन की साफ-सफाई शुरू करा दी गई है।
गंगा की सहायक नदियों में शामिल काली नदी को लोग काला नाला भी कहते हैं। यह नदी मुजफ्फरनगर, मेरठ और हापुड़ की कई फैक्ट्रियों का सीवेज प्रतिदिन अपने जल के साथ बहा रही है। सीवेज में खतरनाक रसायन होने से काली नदी अब आसपास के गांवों में खतरनाक बीमारियां भी बांट रही है। इस कारण दो दर्जन गांवों में भूगर्भ जल लगातार दूषित हुआ है। इसकी जिले में लंबाई करीब 16 किलोमीटर है। जो आगे जाकर बुलंदशहर, कासगंज होते हुए कन्नौज में गंगा में मिल जाती है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए लगभग 51 करोड़ रुपये की लागत से प्लांट का निर्माण होगा और काली नदी को जरूर कुछ शुद्धता मिल सकेगी। जमीन को चिह्नित करने के साथ ही जमीन की साफ-सफाई शुरू करा दी गई है।
अधिशासी अभियंता जल निगम विनय रावत- ने बताया की ततारपुर में जिस स्थान पर एसटीपी बनना है। वहां पर जमीन को चिह्नित करने के साथ ही साफ- सफाई भी कराई जा रही है। टेंडर प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में पूरी हो जाएगी।