हापुड़ में आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के तहत सर्वे में यह खुलासा हुआ है। दिमागी तौर पर भी बच्चे कमजोर मिले हैं, लगभग 25 फीसदी बच्चों में खून की कमी है, जिसमें तीन फीसदी (करीब 900) में हीमोग्लोबिन की मात्रा 8 प्वाइंट से भी कम है। सर्वे के दौरान पता चला कि ऐसे बच्चे खेलकूद में प्रतिभाग से भी घबराते हैं। ऐसे में शारीरिक विकास पिछड़ रहा है।
फिजिशियन डॉ. प्रदीप मित्तल ने बताया कि मजबूत और ताकतवर शरीर में रक्त संचार का बड़ा महत्व है, हीमोग्लोबिन का स्तर सही है तो कई बीमारियां शरीर से दूर रहती है। लेकिन इसका स्तर कम होने के कारण जहां प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है। वहीं, बच्चों का शारीरिक विकास भी प्रभावित होता है।
आरबीएसके की टीम ने जिलेभर में सर्वे कराकर बच्चों में हीमोग्लोबिन का स्तर जांचा था। 25 फीसदी बच्चे ऐसे मिले हैं, जिनमें हीमोग्लोबिन का स्तर 11 से कम है। इन बच्चों में भी 1800 में हीमोग्लोबिन बेहद कम है, बालिकाओं की संख्या इनमें अधिक है। 19 साल तक के किशोरों में हीमोग्लोबिन की कमी उनका शारीरिक विकास रोक रही है। जल्द थकान होने के कारण बच्चे खेलकूद से भी बच रहे हैं। क्योंकि उन्हें जल्दी थकान होनी शुरू हो जाती है। खान पीना भी इन बच्चों का अच्छा नहीं होता, कई बच्चों की लंबाई सामान्य से कम मिली।
सीएमओ डॉ. सुनील त्यागी- ने बताया की स्कूलों में आरबीएसके की टीमों द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। जिन बच्चों में हीमोग्लोबिन कम मिला है, उन्हें दवाएं दी गई है। इसके अलावा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन ए की खुराक भी बच्चों को दी जा रही है।
बच्चों में हीमोग्लोबिन की कमी के लक्षण:
स्वभाव में चिड़चिड़ापन।
सांस लेने में तकलीफ।
भूख में कमी आना।
हर समय थकान और कमजोरी महसूस करना।
सिरदर्द और चक्कर आना।
कमजोर नाखून।
त्वचा में पीलापन दिखना।
बच्चों के शरीर में हीमोग्लोबिन कैसे बढ़ाएं ?
बच्चे के शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए उसे अनार खिलाएं।
बच्चे को किशमिश खिलाएं। इसका सेवन करने से खून बढ़ता है।
आधा कप उबले हुए पालक में करीब 3.2 मिलीग्राम आयरन होता है। बच्चे का हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए उसे पालक का सूप बनाकर पिलाएं।