हापुड़ जिले के तीन ब्लाकों के गांवों में 1.88 करोड़ रुपये से हुए विकास कार्यों में घपले की आशंका को देखते हुए शासन ने जांच बैठा दी है। यह जांच वर्ष 2020-21 में हुए विकास कार्यों को लेकर शुरू हुई है। यह धनराशि वर्ष 2020-21 में तीन ब्लाकों में खर्च हुई थी, उस समय तीनों ब्लॉक का चार्ज एडीओ पंचायत पर था। हापुड़ के साथ प्रदेश भर के कई जिलों में यह जांच शुरू हुई है।
दिसंबर 2020 में प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो गया था। जिसके बाद सभी ब्लॉक के एडीओ को प्रशासक नियुक्त करते हुए पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मई 2021 से पहले ही चुनाव हो गए थे। जिसके बाद पंचायतों में प्रधान बनाए गए, लेकिन शपथ ग्रहण से पहले ही प्रदेश के सभी जिलों के 780 गांवों के खातों से 638 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। पांच से 25 मई 2021 के बीच यह धनराशि खर्च दिखाई गई थी। जिसमें जनपद के हापुड़, गढ़मुक्तेश्वर और सिंभावली ब्लाक के गांवों में भी 1.88 करोड़ रुपये से यह विकास कार्य दिखाए गए थे। मात्र 20 दिन में उक्त धनराशि के निकलने को घपले के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, मामले की शिकायत देवरिया से की गई थी। जिसके बाद जांच दूसरे जिले में भी शुरू की गई। अब जब जांच तेज हो गई है, तो उस समय जिले में तैनात रहे तत्कालीन एडीओ पंचायत और कई सचिव भी फंसेंगे। जांच शुरू होते ही सभी की धड़कनें बढ़ गई हैं और सभी गुपचुप तरीके से जांच की जानकारी भी प्राप्त कर रहे हैं।
डीपीआरओ शिव बिहारी शुक्ला- ने बताया की शासन के आदेश के बाद भुगतान की फाइलों को निकाला गया है। इन सभी की मौके पर जांच कराकर रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट को डीएम को सौंपा जाएगा। जिसे बाद में शासन को भेजा जाएगा।