जनपद हापुड़ में नवजातों को पीलिया जकड़ रहा है, नर्सरी में फोटोथेरेपी के लिए वेटिंग चल रही है। स्वास्थ्य विभाग की नर्सरी फुल है। जिला अस्पताल में बनी नर्सरी बिजली फीडर न बनने के कारण शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में बच्चों को अभिभावक प्राइवेट नर्सरियों में ले जा रहे हैं, जहां अविभावकों की जेब ढीली हो रही है।
जिले में हर साल करीब 35 हजार बच्चे जन्म लेते हैं, इनकी देखरेख के लिए स्वास्थ्य विभाग में इंतजाम नाकाफी हैं। गढ़ रोड सीएचसी में सिर्फ एक नर्सरी है, जिसमें गंभीर बीमार नवजात बच्चों को भर्ती किया जाता है। नर्सरी की क्षमता 15 नवजातों को भर्ती करने की है।
स्वास्थ्य विभाग की नर्सरी फुल है, प्राइवेट अस्पताल की नर्सरी में बच्चे को रखने का खर्च प्रतिदिन करीब दस से 15 हजार रुपये आ रहा है। संपन्न परिवार इस खर्च को झेलने में सक्षम हैं, लेकिन गरीब परिवारों का इस इलाज में बजट बिगड़ रहा है। ऐसे में गरीब परिवार बच्चों को ऐसे अस्पतालों में ले जाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. समरेंद्र राय ने बताया कि पीलिया तब होता है जब आपके बच्चे के रक्त में बिलीरुबिन की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है। बिलीरुबिन एक रसायन है जिसे आपका शरीर तब बनाता है जब यह पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं को तोड़ता है।
हापुड़ सीएमओ डॉ.सुनील त्यागी- ने बताया की नवजात बच्चों को सीएचसी की नर्सरी में बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। बाल रोग विशेषज्ञों का पैनल बीमार बच्चों का इलाज कर रहे हैं। जिला अस्पताल की नर्सरी भी जल्द चालू हो जाएगी।