जनपद हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में परिषदीय स्कूलों के छात्रों को शासन स्तर से मध्याह्न भोजन दिया जाता है। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य का मामला संवेदनशील है। भोजन वितरण से पहले प्रधानाध्यापक, स्टाफ और रसोइयों द्वारा उसे गुणवत्ता की दृष्टि से परखा जाएगा। साथ ही पके हुए भोजन का नमूना स्कूल बंद होने तक सुरक्षित रखा जाएगा। बच्चों को दिए जाने वाले इस भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहते हैं। अब बच्चों को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता की जांच हो सकेगी।
मिड डे मील योजना एक स्कूल फीडिंग प्रोग्राम है। जिसका उद्देश्य वंचित बच्चों को प्रतिदिन (दोपहर का भोजन) कम से कम एक पोषण की दृष्टि से पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना है। परिषदीय स्कूलों में बच्चों को निशुल्क शिक्षा के साथ मध्यान्ह भोजन की सुविधा भी दी हुई है। बच्चों को दिए जाने वाले इस भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहते हैं। सिंभावली के खंड शिक्षाधिकारी सर्वेश कुमार ने बताया कि परिषदीय स्कूलों के कक्षा एक से आठ तक के छात्रों के लिए मध्याह्न भोजन योजना चलाई जा रही है। आए दिन मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहते हैं। अब विभाग ने ऐसी स्थिति से निपटने की योजना तैयार की है। उन्होंने बताया कि मिड- डे मील की सामग्री की गुणवत्ता के लिए यह कदम उठाया गया है।
इसके साथ ही हर स्कूल में रजिस्टर तैयार किया जाएगा। इसमें डीएम, एसडीएम, एसपी, सीएमओ, बीएसए, बीडीओ, बीईओ, प्रभारी चिकित्साधिकारी, अग्निशमन अधिकारी, स्थानीय थानाध्यक्ष के कार्यालय व मोबाइल का नंबर रहेगा। यही नहीं स्कूल के आसपास निजी स्तर पर प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सक का नाम और मोबाइल नंबर भी दर्ज किया जाएगा। जिसे किसी आपात स्थिति में तुरंत बुलाया जा सके।
इसके साथ प्रतिदिन बनने वाले भोजन का नमूना स्कूल की रसोई में स्कूल बंद होने तक रखा जाएगा, ताकि किसी भी तरह की शिकायत पर उस दिन बने भोजन की जांच कराने में आसानी रहे। इससे भोजन की गुणवत्ता में सुधार होगा। वहीं शिकायतों में भी कमी आएगी।