जनपद हापुड़ में कोटला मेवतियान में दो बच्चों में खसरे के लक्षण मिले हैं, जांच में पाया गया है कि इन बच्चों को शुरूआत से ही आवश्यक टीके नहीं लगे। अब तक जिले खसरे की 119 बच्चों में पुष्टि कर चुकी है, जबकि 30 से अधिक की जांच रिपोर्ट आनी बाकि है। बुधवार को अधिकारियों ने टीकाकरण को लेकर बैठक भी की।
कोरोना महामारी में नियमित टीकाकरण पिछड़ गया, जिस कारण पुरानी बीमारियां अब फिर से हावी हो रही हैं। फरवरी महीने में धौलाना और हापुड़ ब्लॉक में खसरा के बड़ी संख्या में मरीज मिले। यह बीमारी कोरोना से अधिक गंभीर है, जिसमें बच्चों के गंभीर होने की संभावना काफी अधिक होती है।
मोती कॉलोनी में एक ही परिवार के छह बच्चों के शरीर पर लाल दाने और तेज बुखार होने पर उनके नमूने लिए गए थे। वहीं 22 माह की हुरीन ने बीमारी के चलते दम तोड़ दिया, उसे खसरा का संदिग्ध मरीज मानते हुए नमूना लिया गया था। लेकिन रिपोर्ट दो महीने बाद भी नहीं आ सकी है।
हाल ही में कोटला मेवतियान में दो बच्चों में खसरे के लक्षण मिले हैं, इनके सैंपल प्रयोगशाला भेजे हैं। जांच में पाया गया है कि इन बच्चों को शुरूआत से ही आवश्यक टीके नहीं लगे। इन बच्चों में खसरे के लक्षण मिले हैं।
सीएमओ डॉ.सुनील त्यागी और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ.संजीव कुमार ने बैठक कर खसरे का टीकाकरण शतप्रतिशत कराने के निर्देश दिए।
धौलाना ब्लॉक के बझेड़ा कला, खिचरा, पिपलैड़ा, डेहरा, हापुड़ ब्लॉक के असौड़ा, बड़ौदा, मोती कॉलोनी, गढ़ के अठसैनी गांव में सबसे अधिक खसरा के मरीज मिले थे।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव कुमार- का कहना है की टीकाकरण से खसरा को रोका जा सकता है, जिन बच्चों का समय से टीकाकरण हो जाता है, उनमें ऐसी बीमारी कम फैलती हैं। टीके से खसरा फैलने की संभावना 95 फीसदी कम हो जाती है, इसलिए अभिभावक बच्चों का टीकाकरण अवश्य कराएं।