जनपद हापुड़ में कोहरे की दस्तक के साथ हाईवे पर चलने वालों के लिए आने वाले कुछ दिन अब खतरनाक होंगे।
देश की राजधानी दिल्ली को प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-9 और एनएच-334 पर प्रतिदिन हजारों वाहनों की आवाजाही होती है।
नए बने एनएच-334 पर स्थिति संकेतक आदि लगने से भले ही बेहतर हों लेकिन, निर्माणाधीन एनएच-9 और पीडब्ल्यूडी की अन्य सड़कों की स्थिति ठीक नहीं है।
हापुड़ में किठौर रोड पर संकेतक टूट चुके हैं। साइड की रेलिंग भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। कुचेसर रोड, बीबी नगर और किठौर रोड के भी हालात सही नहीं है।
एनएच-9 पर अधिकारियों की अनदेखी कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। हापुड़ क्षेत्र में बाईपास का निर्माण अभी भी अधूरा है। बाईपास पर सामान्य दिनों में ही दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
ऐसे में कोहरे के समय में इस हाईवे पर दुर्घटनाओं की आशंका प्रबल होने की आशंका है। हापुड़ शहर के अंदर भी बुलंदशहर रोड, दिल्ली रोड और मेरठ रोड पर रिफ्लेक्टर नहीं लगाए गए हैं, जो वाहन चालकों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
गढ़ क्षेत्र बदरखा अंडरपास, गंगा नगरी ब्रजघाट में पलवाड़ा मोड़ के सामने हाईवे पर एक कट बना हुआ है। जिस पर प्राधिकरण द्वारा सोलर पावर से चलने वाली सिग्नल लाइट लगाई गई थी।
जो तीव्र मोड़ पर राहगीरों को सही दिशा दिखाने में सहायक होने के साथ ही ब्रजघाट समेत आसपास के गांवों के लिए आवागमन करने वाले लोगों के लिए भी संकेतक का काम करती थी।
लेकिन कुछ दिन काम करने के बाद ही लाइट खराब हो गई। सर्दी के मौसम में शाम होते ही गहन अंधेरा और घना कोहरा छाने पर सिग्नल लाइटें, रेडियम संकेतक ही लोगों को सही रास्ता दिखाने में मदद करते हैं। लेकिन पलवाड़ा मोड़ पर लगी सिग्नल लाइट खराब होने से कोहरा और अंधेरा हाईवे पर सफर करने वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
पीडी एनएचएआई- निखिल नारंग ने बताया कि टीम को भेजकर हाईवे पर जांच कराई जाएगी, जहां पर भी संकेतक बोर्ड और रिफ्लेक्टर की आवश्यकता है, वहां पर लगवाए जाएंगे।