जनपद हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में 26 फरवरी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि पर इस बार कई खास संयोग बन रहे हैं। श्रवण नक्षत्र और पांच योग में भगवान शिव की आराधना होगी। श्रद्धालु श्रवण नक्षत्र और पांच योग में भगवान शिव की आराधना करेंगे। जो विशेषतौर पर फलदायी रहेगा।
फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शंकर का माता पार्वती से विवाह हुआ था।
शिवरात्रि का हर क्षण शिव कृपा से भरा होता है वैसे तो ज्यादातर लोग प्रातःकाल पूजा करते हैं, लेकिन शिवरात्रि पर रात्रि की पूजा सबसे अधिक फलदायी होती है और उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है- चार पहर की पूजा ये पूजा संध्या से शुरू होकर ब्रह्म मुहूर्त तक की जाती है इसमें रात्रि का सम्पूर्ण प्रयोग किया जाता है।
पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि त्रयोदशी तिथि 25 फरवरी को सुबह 10 बजकर 06 मिनट से 26 फरवरी को सुबह 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। किंतु, उदया तिथि के मान्य होने से महाशिवरात्रि 26 को मनाई जाएगी। जबकि 26 को ही सुबह 9 बजकर 20 मिनट से चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। इसी संधिकाल में बाबा भोलेनाथ और मां पार्वती का विवाह होगा। इस दिन श्रवण त्र के साथ ही परिघ, शुभ, शिव, छत्र नक्षत्र और श्रीवत्स योग रहेगा। शिवरात्रि से बड़ा कोई परम तत्व नहीं है। शिव पुराण के अनुसार शिवरात्रि व्रत और शिव पूजन के प्रभाव से असंभव कार्य भी पूर्ण हो जाते हैं।
चार प्रहर में विशेष पूजा महाशिवरात्रि पर निशिता काल पूजा का विशेष महत्व होता है। यह पूजा महाशिवरात्रि की रात में 12 बजकर 27 मिनट से रात एक बजकर 16 मिनट तक विविध नैवेद्य के साथ होगी। जबकि चार पहर में प्रथम पहर शाम 6 बज कर 43 मिनट से रात 9 बजकर 47 मिनट तक दूध से अभिषेक होगा। द्वितीय पहर की पूजा रात नौ बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 51 मिनट तक होगी। इसमें दही से शिव का अभिषेक होगा।
तीसरे पहर की पूजा रात 12 बजकर 51 मिनट से भोर में 3 बजकर 55 मिनट तक होगी। अभिषेक के लिए शुद्ध देशी घी का इस्तेमाल होगा। चौथे पहर में भोर 3 बजकर 55 मिनट से सुबह 6 बजकर 59 मिनट तक पूजा होगी और शहद से अभिषेक किया जाएगा। शिव स्तुति, शिव सहस्रनाम, शिव तांडव, शिव चालीसा, रुद्राष्टक, शिवपुराण आदि का पाठ होगा।