सर कांवड़ यात्रा में आस्था का सैलाब बढ़ता जा रहा है। शिवरात्रि करीब आने के साथ ही अपनी मंजिल के लिए कांवड़ियों के कदम तेजी से बढ़ रहे हैं। कोई पिछले कई वर्षों से कांवड़ ला रहा है तो किसी ने मन्नत पूरी होने पर कांवड़ उठाई है। बोल बम के जयकारों के उद्घोष से वातावरण गूंज रहा है।
कांवड़ का महत्व सदियों पूर्व का है। कांवड़ यात्रा सिर्फ यात्रा नहीं भक्तों के असीम धैर्य, प्रेम व लगन का संगम है। जहां-जहां कांवड़िए दिखाई देते हैं, ऐसा लगता है, भक्ति वहां स्वयं प्रकट हो गई हो। कांवड़ यात्रा भक्तों के लिए सुख के द्वार खोलती रहे और भारत के त्यौहारों की परम्परा हमेशा खुशहाली का प्रतीक रहे।
भगवान आशुतोष पर जलाभिषेक करने के लिए कावड़िये गोमुख और हरिद्वार से गंगाजल लेकर तेजी से लौट रहे हैं। शहर की सड़कें केसरिया रंग में रंग गई और चारों तरफ बोल बम के जयकारे गूंज रहे है। आस्था में डूबे कांवड़िये पांव में छाले होने के बाद भी अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रहे हैं।
महाशिवरात्रि के अवसर पर कांवड़िये अपने गतव्य के लिए तेजी से बढ़ रहे है। कांवड़ यात्रा की डगर पर आस्था के कई रंग दिखे है। कही बच्चे तो कही बड़े तो कही युवा कावर जल, कलश जल, डाक जल ला रहे है। चारों तरफ सड़कों पर कांवड़िये केसरिया रंग में रंगे भक्तिमय में मंजिल की तरफ कदम बढ़ रहे है।