हापुड़ के धौलाना में हजारों बीघा जमीन का भू-उपयोग बदलने के मामले की जांच लगभग पूरी हो गई है। जिसे मंडलायुक्त के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। कुछ बिंदुओं को जांच में शामिल करने की योजना है। नियमानुसार ही पूरी जांच की जा रही है। मामले में ग्रेनो औद्योगिक विकास प्राधिकरण का पत्र तत्कालीन व वर्तमान अधिकारी व कर्मचारियों के गले की फांस बन गया है। इस पत्र ने ही तहसील में कृषि भूमि को धारा-80 कर भू-उपयोग बदलने को लेकर चल रही सांठगांठ का खुलासा किया है।
धौलाना विधायक धर्मेश तोमर की शिकायत के बाद ही मामले में शासन स्तर से जांच के आदेश दिए गए थे। उस समय 11 बिंदुओं पर जांच शुरू हुई थी, लेकिन बाद में कई अन्य मामलों में और शिकायतें मिलीं। जिसके बाद जांच अधिकारी अपर आयुक्त जसजीत कौर व अपर आयुक्त अमित कुमार ने इन बिंदुओं को भी जांच में शामिल कर लिया था। मामले में प्रशासन पर तत्कालीन अधिकारियों को संरक्षण देने के आरोप के बाद कई अधिकारियों को जांच से अलग कर लिया गया था। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच के पूरा होने में ग्रेनो औद्योगिक विकास प्राधिकरण का पत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रदेश सरकार का नए उद्योग बसाने पर अधिक जोर है। पिछले कुछ सालों में धौलाना क्षेत्र में नए उद्योग लगने का कार्य तेजी से हुआ है। इसका फायदा भू-माफिया ने उठाया। तत्कालीन डीएम मेधा रूपम ने मामले में मुकदमा भी दर्ज कराया था, लेकिन बड़े स्तर पर सांठगांठ के कारण उल्टा उन्हें ही नुकसान उठाना पड़ा था। अब जांच टीम ने जो दस्तावेज जब्त किए हैं। उसमें देखा गया है कि किन लोगों की जमीन को धारा- 80 में बदला गया है। उसमें से कितनी भूमि पर उद्योग लगे।
इसमें बड़ी बात यह है कि धारा-80 कराकर भू-माफिया ने जमीनों के दामों को कई गुना बढ़ाकर लाभ कमाया है। उक्त भूमि आज भी भू- माफिया के पास ही हैं। जितने मामले धारा-80 के हुए हैं। उनमें से 30 प्रतिशत जमीन पर भी उद्योग नहीं लग सके हैं। तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों ने नए उद्योग लगाने के इन्हीं नियमों में सांठगांठ से लोगों को फंसाया और जमीन का भू-उपयोग बदला।
अपर आयुक्त एवं जांच अधिकारी जसजीत कौर- ने बताया की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। मंडलायुक्त को लगातार अपडेट दे रहे हैं। नियमानुसार ही पूरी जांच की जा रही है।