हापुड़ जिले के 42 गांव और मोहल्लों में मलेरिया का प्रकोप बढ़ गया है। गढ़ ब्लॉक हाई रिस्क की श्रेणी में है। पिछले साल इसी ब्लॉक में 48 मरीज मिले थे। ऐसे में अब मलेरिया के फैलने के आसार हैं। इस साल गर्मी शुरू -होने से पहले ही मलेरिया के सात मरीज मिल चुके हैं।
संचारी रोगों से निपटने के लिए – स्वास्थ्य विभाग का अभियान चल रहा है। डेंगू का खतरा पहले ही शहर पर मंडरा रहा है, 42 मोहल्ले और गांव में भारी मात्रा में लार्वा मिला है। गढ़ ब्लॉक अति संवेदनशील की श्रेणी में है, पिछले साल भी यहां 48 मरीज पॉजिटिव पाए गए थे। ऐसे में इस साल मलेरिया फैल सकता है।
अमूमन बरसात और गर्मियों के मौसम में मलेरिया का अधिक असर देखा जाता है, लेकिन इस साल गढ़ और हापुड़ ब्लॉक में सात मरीज मिल चुके हैं, जिस कारण इस बीमारी के डेंगू से भी अधिक फैलने के आसार हैं।
स्वास्थ्य विभाग और कीट विशेषज्ञों की टीम ने क्षेत्र का सर्वे किया, जिसमें 42 गांव, मोहल्लों में 120 से अधिक स्थान ऐसे चिन्हित किए गए जहां मलेरिया के लार्वा का घनत्व बेहद अधिक था। हालांकि टीम ने लार्वा को नष्ट करा दिया, लेकिन इन क्षेत्रों में अभी भी बीमारी फैलने के पूरे आसार हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने निपटने के लिए माइक्रो प्लान भी तैयार किया है, इसके लिए घर घर टीमें किट के जरिए मरीजों की जांच कर रही हैं, यही अभियान आगे तेज किया जाएगा।
हापुड़ सीएमओ डॉ. सुनील त्यागी- का कहना है की सर्दी लगने के साथ बुखार चढ़ने पर मलेरिया की जांच अवश्य कराएं। स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में जांच की सुविधा उपलब्ध हैं। मलेरिया फैलने वाले संभावित स्थानों को संवेदनशील घोषित कर, निपटने के लिए माइक्रोप्लान तैयार किया गया है।