हापुड़ में सर्दी में मरीजों के दिल की धड़कन सामान्य गति से तेज चल रही हैं, प्राइवेट अस्पतालों के आईसीयू वार्ड में हृदय संबंधी रोगियों की भरमार है। चिकित्सकों का कहना है कि अधिकांश हृदय अटैक सुबह के समय आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश मरीजों में रक्तचाप बढ़ने और सीने में दबाव की परेशानी है।
तपती धूप और चिपचिपी गर्मी से राहत देने वाले सर्दियों के मौसम का लोग बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। हालांकि मौसम में बढ़ती ठंड एक तरफ जहां कुछ लोगों के लिए सुकून लेकर आती है वहीं हृदय रोगियों के लिए परेशानी का कारण भी बनती हैं। सर्दियों का मौसम स्वास्थ्य के लिहाज से हेल्दी माना जाता है, लेकिन दिल के रोगियों के लिए यह मौसम ठीक नहीं है।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव मित्तल ने बताया कि गर्मियों में और सामान्य मौसम में दिल के रोगियों को कोई खास परेशानी नहीं होती, लेकिन सर्दियों में उन्हें ज्यादा तकलीफ होती है। सर्दी में जहां ऑक्सीजन की कमी रहती है, जिससे रक्त वाहनियां संकरी हो जाती हैं, इससे दिल के रोगियों की तकलीफ बढ़ जाती है।
सर्दियों के मौसम में ब्लड प्रेशर सामान्य से कुछ ज्यादा रहता है, जो दिल के रोगियों के लिए परेशानी का सबसे बड़ा कारण है। जिन लोगों का कॉलेस्ट्रॉल बढ़ा रहता है, उनके लिए यह मौसम खासा खतरनाक होता है। इस मौसम में दिल के रोगियों को कई तरह की गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। दिल के मरीजों में घबराहट, हाई ब्लड प्रेशर, सीने में दबाव या जकड़न बढ़ जाती है।
फिजिशियन डॉ. प्रदीप मित्तल ने बताया कि सर्दियों में हार्ट अटैक के मुकाबले हार्ट फेल का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में सांस फूलने की शिकायत को इस मौसम में बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सांस फूलने की परेशानी फेफड़ों में इंफेक्शन के कारण भी हो सकती है। यदि किसी की अचानक बैठे-बैठे भी सांस फूलने लगे तो उसे तुरंत चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। इसमें लापरवाही घातक हो सकती है।