हापुड़ जिले में वायु प्रदूषण की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। लोगों ने बचाव के लिए मॉस्क पहनना शुरू कर दिया है। सड़कों पर लगातार जलता कूड़ा और खुले में रखी निर्माण सामग्री से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को अधिकतम एक्यूआई (वायु गुणवत्ता) 317 अंक दर्ज किया गया। हालांकि, शाम पांच बजे एक्यूआई 266 अंक पर दर्ज हुआ। वहीं आंखों में जलने के मरीज भी बढ़े है।
दशहरे के बाद से जिले में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन, नगर पालिका, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कदम नहीं उठा रहे हैं। दीवाली के बाद से वातावरण में घुला जहर तेजी से फैलने लगा है। जिसकी वजह हापुड़ की आबोहवा जहरीली हो गई है। इस जहरीली हवा से लोगों को काफी दिक्क़त हो रही है। पिछले तीन दिनों से जिले की हवा रेड जोन में पहुंच गई है, इसका मतलब साफ है कि अभी सांस लेने लायक हवा नहीं है। यह हवा लोगों को बीमार कर रही है।
सीएचसी के आंकड़ों पर नजर डालें तो मंगलवार को आंखों और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई। सोमवार को सीएचसी में 105 और मंगलवार को 117 मरीज आंखों में जलन के पहुंचे। आंखों की जांच के लिए सुबह से ही चिकित्सक के कमरे के बाहर लंबी लाइन लग गई।
एडीएम संदीप कुमार- ने बताया की सड़कों पर कूड़ा व पराली जलाने पर पूरी तरह से रोक है। लगातार निरीक्षण कराकर कार्यवाही की गई है। प्रदूषण को रोकने के लिए ग्रैप के नियमों का पालन कराया जा रहा है।