हापुड़ में डीएपी की रैक नहीं मिलने से जिले की अधिकांश समितियों पर स्टाक खत्म हो गया है। नकद केंद्रों पर भी डीएपी नहीं है। गन्ना सहकारी समितियों के गोदाम खाली पड़े हैं। जिससे खाद का संकट बढ़ गया है। ऐसे में किसान अपने दूर दराज के रिश्तेदारों से भी व्यवस्था करा रहे हैं।
आलू और गेहूं बुवाई का समय चल रहा है। जिस कारण किसानों को डीएपी की आवश्यकता है। किसान डीएपी खाद के लिए धक्के खा रहे हैं। किसानों की जबरदस्त डिमांड के चलते बफर गोदाम का स्टाफ भी समाप्ति की ओर है।
अधिकारी समितियों को जरूरत से आधा ही डीएपी उपलब्ध करा पा रहे हैं। 80 फीसदी समितियों के गोदाम खाली पड़े हैं। बाकी गोदामों में भी कुछ ही डीएपी अवशेष है। ऐसे में डीएपी के लिए किसान समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। किसान सुबह से शाम तक स्टाक आने के इंतजार में समितियों पर भटक रहे हैं।
जिले में संचालित नकद केंद्रों की स्थिति भी ऐसी ही है। जिन केंद्रों पर प्राइवेट कंपनियों की डीएपी है, उन्हें भी प्रति हेक्टेयर तीन से चार कट्टे ही मिल पा रहे हैं। एआर कॉपरेटिव प्रेम शंकर ने बाताया कि जिले के लिए 2200 एमटी डीएपी आवंटित हो चुकी है। इसी सप्ताह रैक हापुड़ पहुंच जाएगी।