हापुड़ में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के बावजूद भी शहर के रिहायशी इलाकों में अवैध डेयरियां संचालित हैं। इन पर कार्यवाही के लिए कई बार आदेश हो चुके हैं, लेकिन यह डेयरियां शहर से बाहर नहीं हुई हैं। इस कारण सड़कों पर गंदगी फैल रही है और जलनिकासी भी बाधित हो रही है। नगर पालिका की कार्यवाही नोटिस देने तक ही सिमटी हुई है।
नगर पालिका ने करीब दो साल पहले इन डेयरियों के विरुद्ध न्यायालय में वाद भी दायर किया था। इसके बाद भी पालिका के अधिकारी मात्र लीपोपाप्ती कर रहे हैं। जबकि, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्वयं भी इन अवैध डेयरियों पर कार्यवाही के आदेश दे चुका है। इसके बाद भी कार्यवाही शून्य ही नजर आती हैं।
ऐसे में डेयरियां शहर से बाहर नहीं हुई है। जिससे रास्तों और नालियों में गंदगी का अंबार लगा रहता है। जिस कारण मोहल्लेवासियों को दुर्गंध और गंदगी के कारण परेशानी झेलनी पड़ती है। जलनिकासी भी बाधित हो रही है।
नगर पालिका के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो शहर में लगभग 170 डेयरियां हैं। यह डेयरियां सालों से 20 से अधिक मोहल्लों में संचालित हो रही हैं। एनजीटी की फटकार के बाद नगर पालिका ने नोटिस जारी किए थे और करीब 90 डेयरी संचालकों पर जुर्माना भी लगाया था, लेकिन यह सब कुछ मात्र कागजों में चल रहा है।
ईओ व डिप्टी कलक्टर मनोज कुमार ने बताया कि डेयरियों पर कार्यवाही के लिए नोटिस जारी किए गए थे। एक बार फिर से जुर्माने की कार्यवाही शुरू करेंगे। आदेश का पालन कराया जाएगा।