जनपद हापुड़ में ऊर्जा निगम ने करीब 10 हजार वर्ग गज में बनी दो कॉलोनियों का विद्युतीकरण महज 100 केवीए के दो-दो ट्रांसफार्मरों से कर दिया है। एस्टीमेट में लिए संसाधन और मौके पर लगे खंभे और तारों में काफी भिन्नता है। मामला खुलने पर इसकी शिकायत एमडी कार्यालय में हुई है। जिस पर जांच होने का दावा किया गया है।
दरअसल, कॉलोनी भले ही एचपीडीए से प्रमाणित हो या न हो, ऊर्जा निगम पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अधिकारी अपने बायलॉज में किसी भी कॉलोनी के ऊर्जीकरण को सही बताते हैं। जबकि प्राधिकरण कई बार पत्र भी भेज चुका है। हाल ही में एक नया मामला सामने आया है।
हापुड़ डिवीजन क्षेत्र में 100 केवीए के ट्रांसफार्मरों से दो कॉलोनियों का हाल ही में विद्युतीकरण हुआ है। जिनके नक्शे आर्कीटेक्चर से बनवाए गए हैं। दोनों कॉलोनी का क्षेत्रफल 10 हजार वर्ग गज से अधिक है। लेकिन इसके ऊर्जीकरण में खूब खिलवाड़ हुआ। महज 100 केवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर से कॉलोनी को जोड़ा गया है। हाईटेंशन लाइन डालने से लेकर बिजली के खंभे लगाने में खूब अनियमितता हुई है। एस्टीमेट में जो सामान दर्शाया गया है, वह काफी हद तक मौके से अलग है। प्रत्येक कॉलोनी के ऊर्जीकरण का एस्टीमेट करीब 5.90 लाख रुपये बनाया गया है।
- इन बिंदुओं पर उठ रहे सवाल-
- लोड कम दिखाने के लिए दो कॉलोनी, दो मानचित्र, दो एस्टीमेट, कम खंभे, कम वायर एवं दो पार्क दिखाए हैं।
- एक कॉलोनी में 100केवीए के दो ट्रांसफार्मर लगाए हैं, जबकि 250केवीए का एक ट्रांसफार्मर पर्याप्त होता।
- एस्टीमेट में कुल खंभों की संख्या 11 है, जबकि मौके पर 16 खंभे लगे हैं।
- एस्टीमेट में विजुअल वायर जोड़ा गया है, जबकि मौके पर एचटी केबल लगाया गया है।
- हाईटेंशन लाइन को चहारदिवारी से निकाला गया है।
अधीक्षण अभियंता अवनीश कुमार- ने बताया की ऊर्जीकरण में किसी तरह की अनियमितता नहीं होने दी जाएगी। इन कॉलोनियों के एस्टीमेट की जांच और भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। अनियमितता मिलने पर सख्त कार्यवाही होगी।