जनपद हापुड़ में स्वास्थ्य विभाग की 860 टीमें घर-घर जाकर दस्तक देंगी, पांच बीमारियों को चिन्हित कर, उन्हें ई-कवच पोर्टल पर अपलोड करेंगी। लक्षण के आधार पर रैपिड जांच भी होगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार त्यागी ने बताया कि पहली बार दस्तक अभियान को ऑनलाइन किया गया है, इसका लाभ यह होगा कि आशा जैसे ही संभावित रोगी का ब्योरा पोर्टल पर अपलोड करेंगी, तत्काल उसकी जानकारी ब्लॉक और जिला स्तर पर बैठे चिकित्सा अधिकारियों को हो सकेगी। चिकित्सा अधिकारी रोगी को आगे की जांच और उपचार के लिए रेफर कर सकेंगे।
जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) सतेंद्र कुमार ने बताया कि अब तक दस्तक अभियान के तहत बुखार, आईएलआई, टीबी और कुपोषित बच्चों की जानकारी जुटाई जाती थी, लेकिन इस बार कुष्ठ रोग, फाइलेरिया और कालाजार की जानकारी भी जुटाई जाएगी।
फाइलेरिया और कालाजार के रोगी यद्यपि जनपद में नहीं पाए जाते लेकिन प्रवासी आबादी में मद्देनजर इन दोनों रोगों के लिए भी स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके अलावा दस्तक अभियान में आशा कार्यकर्ता मच्छर जनित परिस्थितियों के बारे में भी जानकारी जुटाएंगी, यह जानकारी उन्हें ई- कवच पर नहीं, बल्कि रजिस्टर में अंकित करनी होगी।
बरसात के बाद फैलने वाली संक्रामक बीमारियों को मात देने के लिये यूपी के गांव-गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर दस्तक देंगी। अभियान में लोगों को स्वच्छता, सैनीटाइजेशन, पोषण युक्त भोजन आदि की महत्ता के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
आशा कार्यकर्ता बताएंगी कि बरसात का मौसम संचारी रोगों के लिए अति संवेदनशील होता है, कुछ सावधानियां बरतकर इन रोगों से बचा जा सकता है। सबसे जरूरी है कि व्यक्तिगत साफ-सफाई रखें। बच्चों को खाना खाने से पहले और शौच जाने के बाद अच्छे से हाथ साफ करने को कहें। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, इससे मच्छर पैदा होते हैं और मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के फैलाव का कारण बनते हैं।