हापुड़ में तापमान गिरने से वातावरण में बढ़े प्रदूषण और उड़ती धूल दमा रोगियों की परेशानी बन रही है। मौसम में बदलता और दिवाली का त्योहार पास आते ही घरों में हो रही सफाई के चलते उड़ती धूल से सांस के रोगियों की दिक्कत बढ़ गई है। हर रोज 30 से ज्यादा मरीज उपचार कराने पहुंच रहे हैं। अब तक 5100 से अधिक इनहेलर बांटे जा चुके हैं।
मौसम में बदलाव का असर लोगों की सेहत पर पड़ रह है। एक्यूआई भी दिनों दिन बिगड़ता जा रहा है। घरों में हो रही सफाई से धूल के कण हवा में घुल रहे हैं। इससे सांस के मरीजों के लिए समस्या बढ़ गई है। पहले पांच से छह ही मरीज आते थे। अब 20 से 30 मरीज पहुंच रहे हैं। बाल रोगियों को नेबुलाइजर देने की जरूरत पड़ रही है।
फिजिशियन डॉ. प्रदीप मित्तल ने बताया कि दिवाली पर घरों में साफ-सफाई होती है। वहीं, सुबह- शाम की ठंड और दोपहर में धूप खिलने से गर्मी हो जाती है। साफ-सफाई या रंगाई-पुताई की वजह से धूल के कण सांस के जरिए फेफड़े तक पहुंच जाते हैं। चूंकि, मरीजों की सांस की नलियां संवेदनशील होती हैं। यह परेशानी अधिक होने पर दमा रोगियों का ऑक्सीजन लेवल कम होने लगता है।