जनपद हापुड़ में कोरोना के नए स्वरूप को लेकर शासन ने अलर्ट घोषित किया है। लेकिन हापुड़ में अभी तक जांच भी शुरू नहीं हुई हैं। सीएचसी, पीपीसी में बने जांच के केंद्र बंद पड़े हैं। चेतावनी का कोई असर नहीं हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 223 लोग कोरोना में जान गंवा चुके हैं।
दो अप्रैल 2020 को जिले में पहला कोरोना का मामला सामने आया था। हालांकि पहली लहर में मौत का तांडव नहीं था, दूसरी लहर में कोरोना के डेल्टा स्वरूप ने कहर बरपाया। तीसरी लहर में कोरोना का ओमीक्रॉन स्वरूप आया, इसका प्रसार अधिक था। लेकिन सेहत पर ज्यादा खतरा नहीं रहा। एक साल तक कोरोना का असर नहीं था, लेकिन अब नए वेरिएंट ने दस्तक दी है। बुलंदशहर और गाजियाबाद में संक्रमित मरीज मिलने के बावजूद अफसर गंभीर नहीं हैं, फिर भी यहां लापरवाही बरती जा रही है।
शासन ने अलर्ट घोषित कर, जांच बढ़ाने के आदेश दिए हैं। लेकिन हापुड़ में इसका कोई पालन नहीं हो रहा। जिला अस्पताल, सीएचसी और पीपीसी में बनाए गए जांच के केंद्र अभी तक बंद पड़े हैं। बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान आउट सोर्सिंग से करीब 90 कर्मचारी भर्ती किए गए थे। जिनका कार्य जांच करना था, लेकिन इनका कार्यकाल अब खत्म हो गया। जिस कारण स्टाफ की कमी से जांच भी ठप हो गई हैं।
सीएमओडॉ. सुनील त्यागी- ने कहा की अस्पतालों में कोरोना जांच की सुविधा है, अब रेंडम जांच भी शुरू कराई जाएंगी। ओपीडी में आने वाले संदिग्ध मरीजों की भी कोरोना जांच होगी। मास्क लगाना शुरू कर दें, फिलहाल जिले में कोई नया केस नहीं है।