हापुड़ में प्राधिकरण भी अपने क्षेत्र के दूषित पानी को शोधित करने के प्रयास में जुटा है। ताकि यहां का दूषित पानी शोधित होकर ही नालों में गिरने के बजाय कृषि कार्यों में प्रयोग किया जा सके। आनंद विहार और प्रीत विहार में सीवर के दूषित पानी को शोधित करने के लिए प्रस्तावित एसटीपी प्लांट पर आने वाले खर्च को कम करने की तैयारी है। 20 हजार वर्ग मीटर के स्थान पर अब से लगभग 3500 वर्ग मीटर भूमि पर ही तैयार किया जाएगा। जल निगम और प्राधिकरण की संयुक्त टीमों ने जमीन की तलाश शुरू कर दी है।
गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे योजना के तहत एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने बड़े नालों पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने की कवायद की जा रही है। पिछले दिनों प्राधिकरण और जल निगम ने भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए आनंद विहार और प्रीत विहार के दूषित जल शोधन के लिए 20 हजार वर्ग मीटर भूमि पर एसटीपी निर्माण का प्रोजेक्ट तैयार किया था। लेकिन इस क्षेत्र मैं अधिक महंगी भूमि होने के कारण इसमें संशोधन करना पड़ा है।
अब एसटीपी प्लांट अधिकतम 3500 वर्ग मीटर भूमि पर ही बनेगा। दोनों कॉलोनी के पानी को शोधन करने के लिए आनंद विहार में ही यह प्लांट बनेगा। कॉलोनी से होकर निकल रहे नाले के आस पास ही भूमि तलाश की जा रही है, ताकि अलग से नाला न बनाना पड़े।
जल निगम और प्राधिकरण की टीमों ने शनिवार को भी इस क्षेत्र का सर्वे किया है। अब 24 फरवरी को मेरठ में एचपीडीए की बोर्ड बैठक प्रस्तावित है। जिसमें एसटीपी समेत कई अन्य महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव रखे जाएंगे। अधिकारियों ने प्रस्ताव तैयार करने शुरू कर दिए हैं।
सचिव एचपीडीए प्रवीण गुप्ता- ने बताया की एसटीपी प्लांट के निर्माण के लिए भूमि की तलाश की जा रही है। जल निगम के अधिशासी अभियंता अमीरुल हसन के साथ प्राधिकरण की टीम ने आनंद विहार में जमीन देखी है। जल्द ही इस पर निर्णय लेकर बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा।