हापुड़ में ठंड का मौसम दिन पर दिन बढ़ रहा है। सर्दी बढ़ने से बच्चों में कोल्ड डायरिया का खतरा मंडरा रहा है। हाड़ कंपाती सर्दी में बच्चे कोल्ड डायरिया और निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। बुधवार को बाल रोग विशेषज्ञों की ओपीडी में 165 बीमार बच्चे पहुंचे, जिनमें दस को भर्ती कराना पड़ा। नवजात बच्चों में पीलिया की समस्या अधिक है, बच्चा नर्सरी के सभी बेड फुल हो गए हैं। सामान्य ओपीडी में 50 फीसदी से ज्यादा मरीज ऐसे हैं जो सर्दी लगने से बीमार पड़े हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. समरेंद्र राय ने बताया कि सर्दी, गलन की अधिकता से बच्चे कोल्ड डायरिया और निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं, इस मौसम में वायरल बुखार, जुकाम, खांसी की चपेट में आने की भी आशंका रहती है। बच्चों, बुजुर्गों में शुरुआती दौर में ही इलाज मिल जाए तो निमोनिया से बचाव हो जाता है। लेटलतीफी से छाती में बलगम भरने लगता है। जो अनदेखी से निमोनिया बन जाता है।
उन्होंने बताया कि प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से बच्चों में सर्दी, खांसी होना आम है, पर इन बीमारियों के साथ तेज बुखार हो और पसीना निकले, सांस फूलने लगे, बच्चा रात में सो न सके, सूखी खांसी आए या दस्त होने लगे, उल्टी हो तो बिल्कुल भी देर न करें। डॉक्टर को दिखाएं क्योंकि यह निमोनिया और कोल्ड डायरिया का संकेत है।
हाड़ कंपाती ठंड से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ठंड का असर तेज होने के कारण बच्चे कोल्ड डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। बुधवार को हापुड़ सीएचसी के बाल रोग विभाग में 165 से अधिक बीमार बच्चे पहुंचे। इनमें अधिकांश कोल्ड डायरिया से पीड़ित थे, साथ ही वायरल बुखार, निमोनिया भी कई बच्चों को था। अधिकांश बच्चे को सर्दी, जुकाम की समस्या रही। दस बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल में ही भर्ती कराया गया।
फिजिशियन डॉ. अशरफ अली ने बताया कि कोहरा और कड़ाके की सर्दी में हृदय और अस्थमा रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे मरीजों को दवाओं के साथ सावधानी भी बरतनी चाहिए।