जनपद हापुड़ में रोडवेज निगम द्वारा रोडवेज बसों का किराया तो बढ़ा दिया गया, लेकिन यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं अधूरी हैं। रोजाना हजारों यात्रियों का आवागमन होता है, जिससे डिपो को लाखों रुपये की कमाई होती है। फिर भी यात्रियों को सुविधाएं अधूरी मिलती है।
हापुड़ डिपो से विभिन्न मार्गों पर 105 बसों का संचालन होता है। इन बसों में रोजाना करीब 25 हजार यात्री सफर करते हैं, जिससे डिपो को औसतन 15 से 16 लाख रुपये प्रतिदिन की आमदनी होती है। करीब तीन माह पूर्व रोडवेज निगम द्वारा बसों के किराया में भी इजाफा किया गया, लेकिन यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
डिपो से संचालित अनेक बसों की सीटें खराब है। किसी बस में सीटें फटी हुई हैं, कहीं फर्स्ट एड बॉक्स गायब है तो किसी बस के शीशे टूटे हुए हैं तो किसी बस में अग्निशमन यंत्र नहीं हैं। इसके अलावा रोडवेज बस अड्डे में शुद्ध और शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगाया गया वाटर एटीएम में कोरोना काल के बाद से बंद पड़ा हुआ है।
डिपो में बसों के सुव्यवस्थित खड़ा करने की सुविधा नहीं है और परिसर के खड़ंजे की हालत भी खराब है। रोडवेज बस अड्डे के अंदर खड़जा टुटा हुआ है, जिसमे हल्की बारिश में यहां गड्ढे में पानी भर जाता है। यात्रियों के बैठने के लिए भी आठ बैंच हैं, जिनपर करीब 30 यात्री ही बैठ सकते हैं।
गर्मी से राहत दिलाने के लिए लगाए गए पंखे सिर्फ घूमते दिखाई देते है, यात्रियों को गर्मी से राहत नहीं दिला पाते। किसी भी तरह से यात्रियों के लिए पूरी सुविधाएं नहीं है।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक संदीप कुमार नायक का कहना है कि बस अड्डा पीपीई मॉडल पर विकसित होना है, जिसमें यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेगी। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अभी स्वीकृति नहीं मिल सकी है। इसके बावजूद भी यात्रियों की जरूरी सुविधाएं प्रदान कराने के लिए डिपो में इंतज़ाम कराए जा रहे हैं।