जनपद हापुड़ में पांच दिन की बारिश के बाद निकली धूप से बंदगोभी की फसल पर ब्लाइट रोग का हमला हो गया है। पूरे जिले में हुई बारिश से सब्जी पैदा करने वाले किसानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि नीम तेल और गोमूत्र के मिश्रण का छिड़काव कर फसल को रोग से बचाया जा सकता है।
किसान सुशील ने बताया कि उमस भर्री गर्मी में पत्ता गोभी में गलना रोग लगा दिया है। बाहर से लगे रोग पर तो छिड़काव कर काम चल जाएगा। लेकिन अंदर लगे रोग पर काबू पाना मुश्किल है।
मोनू ने बताया कि बंद गोभी लगाई थी। एक बीघा में अच्छी पैदावार हो तो करीब 7000 हजार फल आ जाते हैं, लेकिन बेमौसम बरसात के चलते करीब 30 फीसदी फसल पूरी तरह से खराब हो गई है। राजीव का कहना है कि पत्ता गोभी की अच्छी पैदावार के लिए ठंडी आद्र जलवायु की आवश्यकता होती है।
पत्ता गोभी के बीज का अंकुरण 27 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर अच्छा होता है। किसान अर्जुन का कहना है कि जलवायु की उपयुक्तता के कारण इसकी दो फसल ली जाती है।
उन्होंने बताया कि पत्ता गोभी की अगेती फसल लेने के लिए रेतीली दोमट भूमि ही सबसे अच्छी पैदावार देती है। जबकि पछेती और अधिक उपज लेने के लिए भारी भूमि जैसे मृतिका सिल्ट तथा दोमट भूमि उपयुक्त रहती है।
उन्होंने बताया कि पत्ता गोभी की फसल को लगातार नमी की आवश्यकता होती है इसलिए इसकी सिंचाई करना आवश्यक है। कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि पत्ता गोभी में कैबेज मैगट नाम का यह कीड़ा पौधों की जड़ों पर आक्रमण करता है जिसके कारण पौधे सूख जाते हैं।
बताया कि इसकी रोकथाम के लिए खेत में नीम की खाद का उपयोग करें । इसी के साथ चैंपा नाम का कीड़ा जब पौधे में लग जाता है, तो यह पत्तियों का रस चूसता रहता है। जिससे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं।