हापुड़ में ऊर्जा निगम के तीनों डिवीजन में अब पांच किलोवाट से अधिक क्षमता के विद्युत कनेक्शन पर लगे मीटरों के बिल एमआरआई से बनेंगे। मैनुअल रीडिंग लेकर बिल बनाने की प्रक्रिया बंद करा दी गई है। ऐसे करीब 18 हजार उपभोक्ताओं को समय से वास्तविक रीडिंग के बिल मिलेंगे, यूनिट स्टोर का फर्जीवाड़ा भी नहीं चलेगा। वहीं, बड़ी औद्योगिक इकाइयों पर इस महीने का पांच करोड़ बकाया है, जिनसे 31 मार्च तक वसूली के लिए टीम बना दी गई है।
जिले में 2.90 लाख उपभोक्ताओं को मीटर से सप्लाई दी जाती है, इसमें अधिकांश उपभोक्ता दो से चार किलोवाट वाले हैं। इन उपभोक्ताओं के बिल रीडरों द्वारा घर-घर जाकर बनाए जाते हैं। पिछले दिनों ऐसे उपभोक्ताओं के मीटर में रीडिंग स्टोर मिली थी, रीडरों का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें स्टोर रीडिंग को खत्म कर करने की बात उनके द्वारा कही जा रही थी।
रीडिंग संबंधी समस्या सहित अन्य गड़बड़ियों को रोकने के लिए बिजली कंपनी ने एमआरआई से मीटर रीडिंग शुरू की है। इस तरह के फर्जीवाड़ों को रोकने के लिए पहले चरण में पांच किलोवाट से अधिक क्षमता वाले कनेक्शनों की बिलिंग एमआरआई से कराने का फैसला लिया गया है। जिले में यह कवायद शुरू हो गई है, एमआरआई के जरिए उपभोक्ताओं को बिल मिल रहे हैं, इसमें न तो यूनिट स्टोर हो पाती है और न ही रीडर को रीडिंग लेकर बिल बनाने पड़ते हैं, बल्कि ऑनलाइन ही बिल जनरेट हो जाते हैं।
अधीक्षण अभियंता अवनीश कुमार- ने बताया की राजस्व वसूली में सभी सहयोग दें, औद्योगिक इकाइयों पर करीब पांच करोड़ का बकाया है, जो 31 मार्च तक जमा करा लिया जाएगा। इसके अलावा पांच किलोवाट से अधिक क्षमता के कनेक्शनों की बिलिंग अब एमआरआई से होगी। यह सुविधा उपभोक्ताओं को दी जाने लगी है।