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हापुड़

मानसिक रूप से कमजोर कांवड़िए को हापुड़ देहात पुलिस ने छह दिन बाद खोज निकाला

हापुड़ देहात पुलिस ने छह दिन से लापता मानसिक रूप से कमजोर कांवड़िया सतीश को करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच सकुशल बरामद कर परिजनों के सुपुर्द किया। थाना प्रभारी पारस मलिक के नेतृत्व में चली तलाश के बाद परिवार की खुशियां लौट आईं।

Halchal India News
7 अगस्त 2026 को 10:02 am बजे 11.4K
अपडेट: 8 अगस्त 2026 को 10:00 am बजे
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मानसिक रूप से कमजोर कांवड़िए को हापुड़ देहात पुलिस ने छह दिन बाद खोज निकाला
मानसिक रूप से कमजोर कांवड़िए को हापुड़ देहात पुलिस ने छह दिन बाद खोज निकाला
हापुड़। सावन की कांवड़ यात्रा... सड़कों पर दूर-दूर तक भगवा ही भगवा। हर तरफ "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयकारे। करोड़ों शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। इसी अथाह भीड़ में संभल का रहने वाला 24 वर्षीय सतीश भी अपने परिवार के साथ कांवड़ लेकर लौट रहा था। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही देर में यह यात्रा पूरे परिवार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बन जाएगी।
सतीश मानसिक रूप से कमजोर है। उसके पास न मोबाइल था और न ही इतनी समझ कि रास्ता भटकने पर किसी से संपर्क कर सके। यात्रा के दौरान वह अपने परिवार से बिछड़ गया। जब परिवार विश्राम के लिए रुका और सभी सदस्य इकट्ठा हुए तो सतीश वहां नहीं था। पहले लगा कि वह पीछे रह गया होगा, लेकिन मिनट घंटों में और घंटे पूरे दिन में बदल गए। शाम ढल गई, लेकिन सतीश का कोई सुराग नहीं मिला।
इसके बाद परिवार ने कांवड़ यात्रा भूलकर हरिद्वार पुलिस को सूचना दी गई, संभल में गुमशुदगी दर्ज कराई गई और जगह-जगह सतीश के पोस्टर लगाए गए। छह दिन बीत गए, लेकिन हर कोशिश नाकाम रही। सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि पुलिस के पास कोई मोबाइल लोकेशन नहीं थी। सीसीटीवी से भी स्पष्ट सुराग नहीं मिल रहा था और करोड़ों कांवड़ियों की भीड़ में किसी एक व्यक्ति को पहचानना मानो भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा था।
इसी बीच यह सूचना हापुड़ देहात थाना प्रभारी पारस मलिक तक पहुंची। उन्होंने मामले को सामान्य गुमशुदगी मानकर फाइलों तक सीमित नहीं रखा। सबसे पहले संभल में संपर्क कर परिजनों का नंबर हासिल किया। फिर परिवार से लंबी बातचीत कर सतीश की आदतों, हुलिए, मानसिक स्थिति, बोलचाल के तरीके और संभावित दिशा तक की जानकारी जुटाई। हर छोटी-बड़ी जानकारी को सुराग बनाकर तलाश शुरू की गई।
पारस मलिक ने पुलिस की अलग-अलग टीमें बनाई। कांवड़ मार्ग, शिविर, ढाबे, मंदिर, विश्राम स्थल, हाईवे किनारे और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर लगातार तलाश कराई गई। टीमों को सिर्फ फोटो देकर नहीं भेजा गया, बल्कि यह भी बताया गया कि सतीश मानसिक रूप से कमजोर है, इसलिए वह अपना नाम या पता सही तरह से नहीं बता पाएगा। इसी रणनीति ने तलाश को नई दिशा दी।
लगातार छह दिन तक चली इस मशक्कत के बाद आखिरकार पुलिस की मेहनत रंग लाई। हापुड़ देहात पुलिस ने सतीश को सकुशल बरामद कर लिया। पहचान सुनिश्चित करने के बाद थाना प्रभारी पारस मलिक ने खुद परिजनों को फोन कर कहा"घबराइए मत, आपका बेटा सुरक्षित मिल गया है।" फोन पर यह खबर सुनते ही परिवार की आंखों से राहत के आंसू छलक पड़े। जो परिवार पिछले छह दिनों से हर पल अनहोनी की आशंका में जी रहा था, उसके लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।
कुछ ही देर बाद परिजन हापुड़ देहात थाने पहुंचे। जैसे ही उनकी नजर सतीश पर पड़ी, उन्होंने उसे गले से लगा लिया। थाने का माहौल भी भावुक हो उठा। परिवार ने थाना प्रभारी पारस मलिक और पूरी हापुड़ देहात पुलिस का हाथ जोड़कर धन्यवाद किया। उनका कहना था कि जहां उम्मीदें खत्म होती जा रही थीं, वहां हापुड़ पुलिस ने उनका बेटा वापस लौटाकर उनकी दुनिया फिर से आबाद कर दी।
कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में मानसिक रूप से कमजोर और बिना मोबाइल वाले युवक को सकुशल ढूंढ निकालना आसान नहीं था। हापुड़ देहात पुलिस की लगातार कोशिश, समन्वय और धैर्य ने इस कठिन अभियान को सफल बनाया और एक परिवार की खुशियां वापस लौटा दीं।
Hapur Police Reunites Mentally Challenged Kanwariya with Family After Six-Day Search

Hapur: A six-day search for a missing Kanwariya ended on a happy note after Hapur Dehat Police successfully traced and reunited 24-year-old Satish, a resident of Sambhal, with his family during the ongoing Kanwar Yatra.
Satish, who is mentally challenged and was not carrying a mobile phone, got separated from his family while returning from Haridwar with holy Ganga water. Initially, his family believed he had fallen behind in the massive crowd of devotees. However, when he failed to return even after several hours, they abandoned their pilgrimage and launched a desperate search.
A missing person report was lodged in Sambhal, while Haridwar Police was also informed. Posters carrying Satish's photograph were displayed at several locations, but despite continuous efforts for six days, no breakthrough was achieved. The absence of a mobile phone and his inability to communicate properly made the search extremely difficult.
After receiving the information, Hapur Dehat Station House Officer Paras Malik personally took charge of the operation. He contacted Satish's family, gathered detailed information about his appearance, behaviour, and medical condition, and formed multiple police teams to search Kanwar routes, camps, temples, roadside shelters, and crowded areas.
The police finally located Satish safely after sustained efforts. Following identity verification, SHO Paras Malik informed the family that their son had been found safe. Relieved family members immediately reached Hapur Dehat Police Station, where an emotional reunion took place.
The family expressed heartfelt gratitude to Hapur Police for their dedication and timely action. The successful rescue has been widely appreciated as an example of the police's commitment and humanitarian approach during the Kanwar Yatra.


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