जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के नियम बदले, 2 साल बाद रजिस्ट्रेशन के लिए अब JMFC का आदेश अनिवार्य
लोकसभा ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया। अब 2 साल बाद जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) का आदेश अनिवार्य होगा। जानिए नए नियम और सरकार का उद्देश्य।
Halchal India News
3 अगस्त 2026 को 09:30 am बजे 39
अपडेट: 3 अगस्त 2026 को 12:15 pm बजे

नई दिल्ली। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है। नए कानून के तहत अब यदि किसी जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद पंजीकरण कराया जाता है, तो इसके लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) के आदेश को अनिवार्य कर दिया गया है।

अब तक ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप जिलाधिकारी (एसडीएम) या अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति के आधार पर भी जन्म अथवा मृत्यु का पंजीकरण कराया जा सकता था। नए संशोधन के लागू होने के बाद यह अधिकार केवल न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास होगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनेगी।

सरकार का मानना है कि इस बदलाव से फर्जी जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही लोगों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा। समय पर पंजीकरण होने से सरकारी रिकॉर्ड अधिक सटीक और विश्वसनीय बनेंगे, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन, जनगणना, पहचान संबंधी दस्तावेजों और प्रशासनिक कार्यों में भी पारदर्शिता आएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र आज के समय में आधार कार्ड, पासपोर्ट, शैक्षणिक दस्तावेज, बैंकिंग सेवाओं, संपत्ति संबंधी मामलों और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। ऐसे में इन प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

सरकार का उद्देश्य फर्जी पहचान और जाली दस्तावेजों के नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। नए प्रावधान के लागू होने के बाद बिना पर्याप्त साक्ष्य और न्यायिक अनुमति के दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों का पंजीकरण संभव नहीं होगा। इससे सरकारी अभिलेखों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और पहचान संबंधी धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यह संशोधन जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को अधिक मजबूत बनाएगा और नागरिकों को समय पर पंजीकरण कराने के प्रति जागरूक भी करेगा। सरकार ने लोगों से अपील की है कि जन्म या मृत्यु की घटना होने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर ही उसका पंजीकरण अवश्य कराएं, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।


Lok Sabha Passes Birth and Death Registration (Amendment) Bill, 2026; JMFC Approval Mandatory for Registration After Two Years
New Delhi: In a significant move to strengthen the authenticity of official records, the Lok Sabha has passed the Birth and Death Registration (Amendment) Bill, 2026. Under the new provisions, registration of a birth or death more than two years after the event will now require an order from a Judicial Magistrate First Class (JMFC).

Previously, delayed registrations could be approved by the District Magistrate (DM), Sub-Divisional Magistrate (SDM), or other Executive Magistrates. The amendment transfers this authority exclusively to the judiciary to ensure greater transparency and legal scrutiny.

According to the government, the amendment aims to curb the issuance of fake birth and death certificates, encourage timely registration, and improve the reliability of official records. Accurate civil registration data is essential for identity verification, government welfare schemes, passport issuance, education, banking, property matters, and population statistics.

Officials believe the new law will help prevent identity fraud and the misuse of forged documents while strengthening the country's civil registration system. Citizens have also been urged to register births and deaths within the prescribed time limit to avoid legal complications in the future.


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