हापुड़ जिले में प्रत्येक रविवार को स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित होने वाले जन आरोग्य मेले की अब सिर्फ औपचारिकता की जा रही है। चिकित्सकों की जगह फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स ही लोगों का इलाज कर रहे हैं। केंद्रों की ऐसी व्यवस्था पर मरीजों की संख्या भी लगातार घट रही है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर रविवार को आयोजित होना वाला मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला सिर्फ दिखावा ही साबित हो रहा है। यहां समय से चिकित्सक नहीं पहुंचते हैं न ही जरूरी जांच ही हो पा रही है। गर्मी का प्रकोप जारी है, ऐसे में उल्टी- दस्त, डिहाइड्रेशन, बुखार, पेट दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सरकारी अस्पतालों के साथ निजि अस्पतालों में भी मरीजों की भीड़ लग रही है।
मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए शासन के आदेश पर प्रत्येक रविवार को जन आरोग्य मेले लगाए जाते हैं। लेकिन चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण मेले औपचारिकता बनकर रह गए है। ऐसे में आरोग्य मेला से मरीजों की संख्या घटती ही जा रही है।
मोहल्ला मजीदपुरा स्थित नगरीय स्वास्थ्य केंद्र पर लगने वाले जन आरोग्य मेले में उल्टी दस्त, बुखार, पेट दर्द सहित विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए 68 मरीज पहुंचे। लेकिन यहां चिकित्सक अनुपस्थित होने के कारण स्टाफ नर्स द्वारा ही मरीजों का उपचार किया जा रहा था। इस तरह मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
ऐसा ही हाल मोती कालोनी स्थित पीएचसी पर देखने को मिला। यहां बुखार, सर्दी, जुकाम, डिहाइड्रेशन, त्वचा संबंधित रोग, दाद, पेट दर्द के अधिक मरीज आए। लेकिन यहां भी चिकित्सक अवकाश पर थे, जिस कारण स्टॉफ नर्स द्वारा ही मरीजों को देखकर परामर्श के साथ दवाई दी जा रही थी। यहां कुल 93 मरीज पहुंचे, लेकिन चिकित्सक की अनुपस्थिति के कारण स्टाफ नर्स से दवाई लेकर वापस लौट गए। स्वास्थ्य कर्मियों की माने तो पिछले छह माह में यह संख्या लगभग आधी रह गई है।
सीएमओ डॉ. सुनील त्यागी- ने बताया की चिकित्सक को मौजूद रहना चाहिए। चिकित्सक किस कारण से मौजूद नहीं हैं। इसकी जांच कराई जाएगी।