हापुड़ जिले में गन्ने की फसल का रकबा करीब ढाई फीसदी बढ़ा है। फिर भी उत्पादन 30 फीसदी तक कम निकल रहा है। बरसात के बाद फसल में फड़का कीट के प्रकोप ने उत्पादन को गिरा दिया है। फसल सूखने लगी है, पौधे का रंग भी पीला पड़ रहा है। किसान क्रेशरों पर गन्ना डाल रहे है। चीनी मिल छह नवंबर से चलेंगे।
सरकार ने पिछले साल गन्ने के दाम बढ़ाए, ऐसे में करीब ढाई फीसदी रकबा भी बढ़ गया। बरसात से पहले फसल निरोगी थी, लेकिन पिछले दो महीने से गन्ने की फसल में फड़का लग गया है। इस कीट की संख्या इतनी अधिक है कि गन्ने की फसल के पत्ते को पूरी तरह ढक लिया है। पत्ते का रस चूसकर गन्ने को भी सुखा दिया है। पत्ती काली पड़ने लगी है और गन्ने की बढ़वार भी रुक गई है।
जिले में क्रेशर चालू हो गए हैं। रसूलपुर निवासी जतिन चौधरी, धनवीर शास्त्री, दत्तियाना निवासी रजनीश त्यागी, पवन हूण समेत अनेक किसानों ने बताया कि गन्ने का वजन बहुत कम निकल रहा है। प्रति बीघा 55 से 60 क्विंटल गन्ना आसानी से निकलता था। लेकिन अब सिर्फ 40 से 45 क्विंटल ही निकल रहा है। को-0238 प्रजाति में यहा रोगा ज्यादा देखने को मिल रहा है।
हापुड़ गन्ना समिति सचिव मनोज कुमार- ने बताया की किसानों को गन्ने की को-0238 प्रजाति के स्थान पर दूसरी प्रजातियों की बुवाई के बारे में लगातार जागरूक किया जा रहा है। किसानों ने दूसरी प्रजातियों का गन्ना बुवाई भी किया है। चीनी मिल छह नवंबर से चलेंगे।