हापुड़ – किसी दूसरे शहर में जाकर इंसान खुद को अकेला तो समझता ही है साथ सी साथ खुद को असहाय भी समझता है। क्योंकि अनजाने शहर में उसका कोई जानकार ना होने की वजह से ये सब सोचा जाता है।
इस सोच का जीता जागता सबूत हापुड़ के छिजारसी टोल पर देखने को मिला। जहां एक बाइक सवार युवक पर चांटे ही चांटे लग रहे थे और बाइक सवार युवक ऐसे चांटे खा रहा था कि मानो उसने बहुत बड़ा जुर्म कर दिया हो। बाइक सवार युवक का जुर्म सिर्फ इतना था कि एक तो वो किसी दूसरे शहर का रहने वाला था दूसरी वजह उससे दूसरी बाइक में उसकी बाइक हल्की सी लग गई।
इसी वजह से युवक में चांटे लग रहे थे। कहते है ना किसी के साथ कोई परेशानी हो जाए तो आज के जमाने में भीड़ किसी की मदद नहीं करती ये भी साबित यहीं हुआ। जब बाइक सवार युवक में चांटे लग रहे थे उस वक्त लोगों की भीड़ लग गई थी। मगर उस भीड़ ने ना ही तो पीटते युवक को बचाया और ना ही पीटने की वजह पूछी।
पिट रहे बाइक सवार युवक के साथ एक छोटी बच्ची थी जो रो- रो कर बोल रही थी। कि मत मरी मत मरो, छोटी सी बच्ची के ना तो पीटने वाले युवक को आंसू दिखे और ना ही भीड़ को बस बेबस युवक पीटता रहा। पीटने वाले युवक की बिना गलती के पीटने की मजबूरी ये रही कि वो किसी दूसरे शहर का रहने वाला था। जिसको वहां या आसपास कोई नहीं जानता था। जिसकी वजह से वो चांटे पर चांटे खाता रहा।
ये घटना समाज में बढ़ती संवेदनहीनता और लोगों की उदासीनता को दर्शाती है। लोग किसी की मदद करने के बजाय तमाशा देखने में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। इस घटना से यह भी पता चलता है कि अनजान शहरों में लोगों को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, खासकर जब उनके साथ कोई न हो।