जनपद हापुड़ में बिजली चोरी के नोटिस (प्रपत्र- 4) से करोड़ों का घोटाला करने के मामले में फंसे एई राजस्व का स्थानांतरण एसडीओ पिलखुवा के पद पर हो गया है।
दरअसल, चेकिंग अभियान में जिन उपभोक्ताओं को बिजली चोरी करते पकड़ा जाता है। उन्हें ऊर्जा निगम की ओर से जुर्माने का नोटिस जारी किया जाता है। गढ़मुक्तेश्वर डिवीजन में इन्हीं सरकारी नोटिसों पर करोड़ों का घोटाला हुआ है। विजिलेंस ने करीब 9 महीने पहले 100 से अधिक ऐसे नोटिस पकड़े थे, जिन पर लिखा जुर्माना लाखों में था।
जबकि राजस्व पोर्टल पर शुल्क कुल जुर्माना का पांच से आठ गुना कम तक जमा हुआ। इस मामले में उच्चस्तरीय जांच बैठी विजिलेंस से तमाम सबूत लिए गए। इस प्रकरण से जुड़े एक लिपिक को एसई कार्यालय से अटैच कर दिया गया। लेकिन जांच के नाम पर दोषियों को संरक्षण दिया जाता रहा, यही कारण है कि फर्जीवाड़ा सामने आने के बावजूद अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।
जिस कार्यालय से यह फर्जीवाड़ा हुआ, उसके जिम्मेदार एई राजस्व को अब पिलखुवा का उपखंड अधिकारी बना दिया गया है। निगम के अधिकारियों की नजरों से देखें तो यह एक तरह की पदोन्नति है। क्योंकि पिलखुवा डिवीजन राजस्व के मामले में सबसे बड़ा है। जिस तरह तत्कालीन मुख्य अभियंता ने अपने सेवानिवृत्त होने से चंद दिन पहले यह आदेश जारी किया है, उस पर भी सवाल उठते हैं।
चर्चा तो यह भी है कि यह आदेश बैक डेट में किया गया है हालांकि इसकी किसी ने अधिकारिक पुष्टि नहीं की है। वहीं, एई राजस्व के गढ़ डिवीजन से जाते ही 20 से अधिक नए फर्जीवाड़े से जुड़े नोटिस सामने आए हैं, जिनमें लाखों का फर्जीवाड़ा मिला है।