जलवायु परिवर्तन मानव स्वास्थ्य पर गहरा डाल रहा दुष्प्रभाव, पांच साल में मिले अस्थमा के 4200 मरीज
जनपद हापुड़ में जलवायु परिवर्तन मानव स्वास्थ्य पर गहरा दुष्प्रभाव डाल रहा है। रोगों के बढ़ने के साथ हार्मोंस भी गड़बड़ा रहे हैं। पिछले पांच साल के अंदर 4200 अस्थमा के मरीज रिकॉर्ड किए गए हैं।
फिजिशियन डॉ. गौरव मित्तल का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग तक तेजी से अस्थमा की चपेट में आ रहे हैं। लगातार खांसी और सांस लेने में दिक्कत इसकी मुख्य पहचान है।
एक दशक पहले ऐसे मरीज काफी कम थे, अब बढ़ते ही जा रहे हैं। हर मौसम में अस्थमा के रोगी आते हैं। वातावरण प्रदूषित होने के कारण ही इस तरह की समस्या बन रही है।
फिजिशियन डॉ. प्रदीप मित्तल ने बताया कि युवा पीढ़ी भी हृदय रोगों की चपेट में आ रही है। इसकी एक वजह जलवायु परिवर्तन भी है। 25 से 30 साल के युवाओं को अटैक आ रहा है। पहले यह बीमारी बुजुर्गों में ही देखने को मिलती थी,
लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं । चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत सिंह बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन से चर्म रोग भी तेजी से बढ़े हैं। इसमें स्कैबीज, हरपीस के साथ त्वचा कैंसर भी शामिल है।
भौतिकविद डॉ. अजय मित्तल ने बताया कि हाल ही में पड़े सूर्यग्रहण को दूरबीन से देख पाना भी मुश्किल हुआ था, क्योंकि वातावरण में छाए प्रदूषण के कण सामान्य कणों के मुकाबले काफी बड़े थे। ऐसा पहली बार ही हुआ है। जलवायु परिवर्तन मानव, जीव जंतुओं और पेड़ पौधों के लिए भी नुकसानदायक है।