जनपद हापुड़ के ब्रजघाट में महाशिवरात्रि का पर्व 8 मार्च को मनाया जाएगा। ब्रजघाट, हरिद्वार से गंगाजल लाने वाले शिवभक्तों का उत्साह चरम पर है। गंगा नगरी में दुकानदार भी दोगुने उत्साह के साथ कांवड़ बनाने में जुटे हैं। कांवड़ की कीमतों में काफी उछाल आ गया है।
सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का त्योहार बहुत ही खास माना जाता है। महाशिवरात्रि इस बार 8 मार्च, शुक्रवार की है। हर वर्ष गढ़, सिंभावली, बहादुरगढ़ और आसपास के क्षेत्र से ब्रजघाट और हरिद्वार से हजारों कांवड़िये गंगाजल लाते हैं। कांवड़ के ढांचे बनाने वाले दुकानदार राम भरोसे के मुताबिक महाशिवरात्रि आने से डेढ़ महीने पहले उनका परिवार कांवड़ के ढांचे तैयार करने में जुट जाते हैं। बांस, सुतली, टूल, पतली डंडी, गोटा, लाल कपड़ा, टोकरी आदि सामान की जरूरत होती है। ऐसे में लागत बढ़ने से कांवड़ की कीमतों में काफी उछाल आ गया है। कांवड़ पहले 150 से 200 रुपये में मिलती थी।
इसके अलावा बैकुंठी कांवड़ जो पहले डेढ़ सौ रुपये की मिलती थी, वो 400 में उपलब्ध है। वहीं, खड़ी और झूलेश्री कांवड़ की कीमत भी दोगुनी हो गई है। हरिद्वार से जल लाने वाले शिव भक्त सुशील ने बताया कि उन्हें कांवड़ लाते हुए 10 साल हो गए हैं। पहले बैकुंठी कांवड़ के ढांचे 150 रुपये में मिल जाते थे, वहीं अब 400 रुपये में बाजार में उपलब्ध है। जहां पहले 500 में पूरी कांवड़ लेकर वापस घर आ जाते थे, अब केवल 500 में कांवड़ के ढांचे और सजावट का सामान ही मिल पाता है।