जनपद हापुड़ में 600 करोड़ के नलकूप बिल घोटाले से जुड़े करीब 250 लेजर और चालान बुक हापुड़ के रिकॉर्ड रूम से मेरठ भेजे गए हैं। ऐसे में अब पुराने नलकूप कनेक्शन का यहां रिकॉर्ड नहीं है। ऑनलाइन एंट्री होने से जो कनेक्शन छूट गए हैं, उन पर बकायेदारी का पता भी नहीं चल रहा है। यह मामला 25 हजार किसानों से जुड़ा है।
वर्ष 2004 से ही नलकूप बिल घोटाले की जांच चल रही है, अनेक संस्थाएं पड़ताल कर चुकी हैं। लेकिन अधूरे दस्तावेज और गुम हुई चालान बुक घोटाले की तह तक नहीं पहुंचने देती। एमडी कार्यालय से एक विशेष टीम का गठन हुआ, जो हापुड़ के रिकॉर्ड रूम से नलकूप बिल घोटाले से जुड़े दस्तावेज अपने साथ ले गई। इन दस्तावेजों में पुराने लेजर, चालान बुक और बिल बुक भी शामिल हैं।
हापुड़ के रिकॉर्ड रूम में अब इस घोटाले से जुड़े दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे में बहुत से कनेक्शन अभी भी ऑनलाइन होने से वंचित रह गए। ऐसे किसानों के वास्तविक बिल पता नहीं चल पा रहे हैं। एमडी कार्यालय से भी दस्तावेजों का मिलना आसान नहीं है, क्योंकि पहले इसके लिए अधीक्षण अभियंता को अनुमोदन देना होगा। वर्ष 2006 में ऐसे बिलों को संशोधित करने का प्रयास हुआ था। उस समय ओटीएस योजना लागू थी, बहुत से किसानों की पेनाल्टी और जुड़कर आ रही बकायेदारी को खातों से हटाया गया लेकिन, मामला बढ़ा तो फिर से अधिकारियों ने हटाई गई राशि को खातों में जोड़ दिया।
अधीक्षण अभियंता यूके सिंह- ने बताया की नलकूप बिलों से जुड़े मामले की उच्चस्तरीय जांच हुई है। जांच टीम यहां से रिकॉर्ड भी साथ ले गई है। इस मामले में जैसा आदेश मिलेगा, उसका पालन कराया जाएगा।