जनपद हापुड़ में जिले में इस साल भी डेंगू कहर बरपाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने 65 गांव, मोहल्लों को अति संवेदनशील घोषित कर, लाल श्रेणी में रखा है। कीट विशेषज्ञों की टीम ने दस बार नमूने जुटाए हैं। शहर के तगासराय और अर्जुननगर में सबसे अधिक डेंगू के लार्वा हैं। विभाग ने माइक्रो प्लान तैयार कर डेंगू पर नियंत्रण पाने का प्रयास शुरू किया है।
बीते साल डेंगू ने जमकर कहर बरपाया था, सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 76 मरीजों में स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू होने की पुष्टि की थी, जबकि इसके कई गुना मरीज प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती रहे। धौलाना क्षेत्र में दिमागी बुखार का मामला भी सामने आया था, जो कई दशक बाद देखा गया। इन दिनों संचारी रोग नियंत्रण अभियान चल रहा है, जिसमें लार्वा खोजने का कार्य भी शुरू हो गया है।
हापुड़ के 35 मोहल्लों और 30 गांवों में डेंगू का खतरा मड़रा रहा है। कीट विशेषज्ञों की टीम ने तीन महीने में दस बार इन गांवों से सैंपल एकत्र किए हैं। हापुड़ शहर के तगासराय और अर्जुननगर में भारी संख्या में मिला लार्वा मिला हैं। ऐसे में यहां के लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
साथ ही शहर में मलेरिया भी तेजी से पैर पसार रहा है। इन दिनों कोरोना की दस्तक ने भी स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। बरसात से पहले यदि लार्वा पर नियंत्रण पा लिया गया तो डेंगू का प्रकोप कम हो सकता है, अन्यथा फिर से जिले को डेंगू से जूझने के लिए तैयार रहना होगा। विभाग ने माइक्रो प्लान तैयार कर डेंगू पर नियंत्रण पाने का प्रयास शुरू किया है।
गांव नवादा में आबादी के बीच खुले नाले में बड़ी संख्या में डेंगू का लार्वा पिछले साल भी मिला था इस बार भी लार्वा होने की संभावना है। हापुड़ सीएमओ ने ग्राम प्रधान इंद्रेश देवी से वार्ता कर, साफ सफाई के निर्देश दिए हैं। ताकि मच्छर जनित रोगों से ग्रामीणों को राहत मिल सके। गांव के वाह्य छोर पर भी गंदगी व जलभराव को लेकर, ग्राम प्रधान को संचारी रोग नियंत्रण अभियान में सहयोग की अपील की।
हापुड़ सीएमओ डॉ.सुनील त्यागी- का कहना है की जिन इलाकों में डेंगू का लार्वा सबसे अधिक मिला था, उन क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। डीएमओ सतेंद्र कुमार टीम सहित इन क्षेत्रों में लोगों को जागरूक कर रहे हैं। आस पास पानी न भरने दें, साथ ही साफ सफाई रखें।