हापुड़ में महायोजना 2031 के लागू होने के बाद से ही हापुड़ निवेशकों की पसंद बना। हापुड़ में कारोबार की संभावनाएं बढ़ गई है। इस वित्तीय वर्ष के महज दस महीने में 201 से अधिक बड़े मानचित्र प्राधिकरण ने स्वीकृत किए हैं, जिसके सापेक्ष एचपीडीए को रिकॉर्ड 17.98 करोड़ की आय हुई है। पिछले तीन वर्ष के मुकाबले प्राधिकरण की आय तीन गुना बढ़ गई है। समस्त स्टाफ की मेहनत के बाद ही यह उपलब्धि मिली है।
दरअसल, एनसीआर में हापुड़ की लोकप्रियता काफी बढ़ गई है। क्योंकि आस पास हाईवे और यहां की भौगोलिक स्थिति कारोबार के लिए अनुकूल है। पांच साल पहले प्राधिकरण के खर्चे भी में उसकी आय से पूरे नहीं हो पाते थे। ऐसे में अफसरों को विशेष योजना बनानी पड़ी। महायोजना 2031 ने प्राधिकरण का भंडार ही भर दिया। इस सकारात्मक माहौल के बीच आवासीय तलपट मानचित्र, औद्योगिक क्षेत्र, वेयर हाउसिंग के कई मानचित्रों का प्राधिकरण में आवेदन किया गया।
वर्तमान वित्त वर्ष में प्राधिकरण ने 320 के सापेक्ष 201 मानचित्रों को स्वीकृति दी है। इसके सापेक्ष प्राधिकरण को 17.98 करोड़ की आय हुई है। दो महीने अभी शेष हैं, कई अन्य बड़े मानचित्र भी इस अवधि में आने को तैयार है।
स्टाफ की कमी से जूझ रहा प्राधिकरण, फिर भी बढ़ी आय :
- प्राधिकरण में सिर्फ आठ अवर अभियंता बचे हैं, जोकि दो वर्ष पूर्व तक 21 थे।
- सिर्फ चार सहायक अभियंता हैं, जो अप्रैल में सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
- प्लानिंग अनुभाग में सिर्फ एक नगर नियोजक कार्यरत है।
- प्राधिकरण में सचिव और ओएसडी नहीं हैं।
वीसी एचपीडीए डॉ. नितिन गौड- ने बताया की एचपीडीए को इस वित्तीय वर्ष में मानचित्र स्वीकृति से 17.98 करोड़ की आय हुई है। साथ ही हापुड़ को भी नए मानचित्रों की स्वीकृति से विकास के पंख लगेंगे।