हापुड़ में महंगाई की मार के कारण सलाद की थाली से प्याज और खीरा गायब हो गया है। प्याज 60 रुपये व खीरा 70 प्रति रुपये किलो बिक रहा है। लहसुन के दाम भी लोगों की जेब ढीली कर रहे हैं। पिछले सप्ताह 320 रुपये किला बिकने वाला लहसुन अब 400 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है। इससे आम लोगों के किचन का बजट बिगड़ गया है।
महंगाई है कि कम होने का नाम नहीं ले रही है। एक चीज सस्ती होती है,तो दूसरी चीज महंगी हो जाती है। सब्जियों के बढ़ते दाम आए दिन रसोई का बजट बिगाड़ते हैं। कभी टमाटर के दाम तो कभी मिर्च के दाम बढ़ जाते हैं। इन दिनों दूसरे राज्यों से मंडी में लहसुन की आवक हो रही है, जिससे इसके दामों में बढ़ोतरी हो गई है। हापुड़ नवीन मंडी में कोटा, इंदौर, एटा के साथ हिमाचल मंडी से लहसुन पहुंच रहा है। वहीं ईरान से भी इसकी आवक हो रही है।
पिछले सप्ताह 320 रुपये किलो बिकने वाला लहसुन अब 400 रुपये किलो तक बिक रहा है। हालांकि ईरानी लहसुन की कीमत कम है और 300 रुपये प्रतिकिलो तक बिक रहा है। वहीं खीरा की आवक भी पहाड़ी क्षेत्रों से हो रही है, जिसके कारण खीरा के दाम भी 70 रुपये प्रतिकिलो पहुंच गए हैं। वहीं, फुटकर में प्याज की कीमत 60 रुपये किलो है। प्याज और लहसुन की चढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
सब्जी विक्रेता नंदकिशोर सैनी ने बताया कि स्थानीय सब्जी की मंडी में आवक शुरू होने से हरी सब्जियों के दामों में गिरावट आई है। लेकिन लहसून, खीरा और प्याज की आवक दूसरे राज्यों से होने के कारण इनके दाम बढ़ गए हैं।