हापुड़ में जीएसटी की समाधान योजना की आड़ में व्यापारी अपने कारोबार में शून्य लेनदेन दर्शा रहे हैं और कारोबार में बढ़ोत्तरी होने के बाद भी जीएसटी टैक्स चोरी कर रहे हैं। बीती तिमाही रिटर्न दाखिल करने वाले 215 व्यापारियों ने जीएसटी को खाली बही खाता दिखा दिए हैं। जीएसटी अधिकारी ऐसे व्यापारियों की कुंडली खंगाल रहें हैं जांच में टैक्स चोरी पाए जाने पर कार्यवाही की तैयारी है।
(GST) जमा करना कानूनी तौर पर सभी व्यावसायिक या निवेश करने वालों के लिए जरूरी है। दरअसल, राज्यकर एवं वस्तु सेवाकर विभाग में जिले के चारों खंडों में 1446 व्यापारी जीएसटी समाधान योजना में पंजीकृत हैं। योजना में शामिल व्यापारियों को 1.5 करोड़ रुपये के टर्नओवर पर प्रत्येक तिमाही पर एक फीसदी टैक्स चुकाना होता है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में समाधान योजना में शामिल कारोबारियों ने करीब 74 लाख रुपये का टैक्स जमा किया था।
कारोबार में वृद्धि होने के बाद भी वित्तीय वर्ष 2024-25 में टैक्स जमा करने में रुचि नहीं दिखाई गई। जीएसटी अधिकारी की टैक्स चोरी पकड़ने के लिए व्यापारियों के प्रतिष्ठानों की रेकी कर रहे हैं। विभाग की रडार में आने के बाद जांच कराई जा रही है। राज्यकर विभाग ने पिछले माह जीएसटी अदा करने में रुचि न दिखाने वाले समाधान योजना में पंजीकृत 815 व्यापारियों की सूची तैयार की थी और उन्हें नोटिस भी भेजे थे। इसके बाद कुछ व्यापारियों ने टैक्स जमा कराया है। इसके बाद भी वित्तीय वर्ष में अभी तक करीब 35 लाख रुपये का टैक्स ही जमा हो पाया है।
जीएसटी उपायुक्त लालचंद- ने बताया की समाधान योजना में पंजीकृत कुछ व्यापारियों ने पंजीयन के बाद व्यापार की शुरूआत नहीं की है। लेकिन विभाग को पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार राजस्व कम मिला है। ऐसे में शून्य व्यापार दर्शाने वाले व्यापारियों के साथ अन्य व्यापारियों के कारोबार और लेनदेन की जांच की जा रही है। जांच में टैक्स चोरी पाए जाने पर जुर्माना वसूला जाएगा।